हरियाणा की चुनावी बिसात पर जातिगत समीकरणों को साधकर जिस तरह से सोची समझी रणनीति के तहत सियासी दलों ने अपने प्रत्याशियों को रण में उतारा है। इससे प्रदेश की सभी दस लोकसभा सीटों पर मुकाबले और रोचक होने के आसार हैं। समीकरणों को देखें तो यह बात तय है कि हरियाणा में इस बार जातिगत धुव्रीकरण का खेल जमकर खेला जाएगा। सियासी दल और उनके प्रत्याशी भी इन्ही समीकरणों में अपनी जीत की राह भी ढूंढ रहे हैं।
हरियाणा की सियासत में यदि जातिगत समीकरणों पर नजर डालें तो प्रदेश में करीब 17 प्रतिशत से अधिक वोट जाट बिरादरी के हैं। ब्राह्मण, बनिया और पंजाबी मतदाताओं की संख्या लगभग 30 प्रतिशत है। ओबीसी (अहीर और यादव) मतदाताओं की संख्या भी 24 प्रतिशत के लगभग है। जबकि करीब 21 प्रतिशत मतदाता अनुसूचित जाति और शेष मतदाता गुर्जर व अन्य जातियों से हैं। प्रदेश की कुल 10 सीटों में से अंबाला और सिरसा सीट तो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। लेकिन शेष 8 सीटों पर राजनीतिक पार्टियों ने जातिगत समीकरणों का गणित समझते हुए धुरंधरों को मुकाबले में उतारा है।
करनाल सीट पर भाजपा ने एक बार फिर पंजाबी प्रत्याशी पर ही दांव खेला है। करनाल सीएम सिटी है और सीएम भी पंजाबी समुदाय से हैं। यहां कांग्रेस ने ब्राह्मण चेहरा आगे किया है, तो इनेलो ने जाट, जजपा-आप गठबंधन ने बनिया और बसपा-लोसुपा गठबंधन ने रोड़ जाति का प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। इसी तरह जाटलैंड रोहतक में जहां भाजपा ने ब्राह्मण चेहरे पर भरोसा जताया है, वहीं कांग्रेस, इनेलो और जजपा-आप गठबंधन ने जाट प्रत्याशियों को चुनावी रण में भेजा है। यहां बसपा-लोसुपा गठबंधन ने विश्वकर्मा जाति के प्रत्याशी पर दांव खेला है। टिकट वितरण का गणित यदि देखें तो इस सीट पर चुनाव जाट-गैर जाट समीकरणों के बीच फंसकर रोचक बनेगा।
हिसार की बात करें तो भाजपा ने यहां जाट कार्ड खेला है। जबकि कांग्रेस ने बिश्नोई परिवार के चेहरे को आगे किया है, तो इनेलो और जजपा-आप गठबंधन ने भी मैदान में जाट प्रत्याशी उतारे हैं। बसपा-लोसुपा गठबंधन ने इस सीट पर ब्राह्मण चेहरे के साथ समीकरण उलझाने का प्रयास किया है। यहां भी मुकाबला कांटे के रहने के आसार है।
भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट पर भी भाजपा ने फिर से जाट चेहरे पर भरोसा जताया है, तो कांग्रेस ने भी जाट प्रत्याशी को ही टिकट दी है। लेकिन इनेलो और जजपा-आप गठबंधन ने यहां ओबीसी चेहरों को मैदान में उतारकर नए समीकरण पैदा किए है। बसपा-लोसुपा गठबंधन यहां पायलट परिवार के प्रत्याशी को मैदान में उतारा है।
गुरुग्राम सीट पर भाजपा ने जहां अहीरवाल को प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस ओबीसी चेहरे को टिकट दी है। लेकिन इनेलो ने यहां राजपूत प्रत्याशी व जजपा-आप और बसपा लोसुपा ने यहां मुसलिम चेहरों पर दांव खेलकर मुकाबला रोचक बनाने का प्रयास किया है।
फरीदाबाद सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने गुर्जर चेहरों पर बाजी खेली है। लेकिन इनेलो ने राजपूत, जजपा-आप ने ब्राह्मण और बसपा-लोसुपा ने यहां जाट चेहरे को चुनावी रण में उतारकर समीकरणों को भुनाने की कोशिश की है। बहरहाल, अब देखना यह है कि जातिगत समीकरणों को सियासी दल कैसे अपनी जीत में तब्दील करते हैं।