कांग्रेस के चक्रव्यूह में भाजपा: मनोहर और हुड्डा की साख दांव पर, हाई कमान के सामने दोनों की अग्निपरीक्षा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 11 May 2024 11:46 AM IST
सार
हरियाणा में भाजपा कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंस गई है। तीन विधायकों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद समीकरण बदल गए हैं। मनोहर और हुड्डा दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की साख दांव पर है।
Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में चल रहे लोकसभा चुनाव के शोरगुल के बीच सत्ताधारी पार्टी भाजपा कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंस गई है। तीन निर्दलीय विधायकों को भाजपा से तोड़कर अपने साथ लाकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बड़ा सियासी दांव खेलकर भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है।
हुड्डा के इस दांव से भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है और प्रदेश भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लोकसभा चुनाव के बीच सरकार को संकट से निकालने में जुट गया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल निर्दलीय व जजपा के विधायकों को साध रहे हैं। इससे पहले दोनों नेताओं ने लोकसभा चुनाव को लेकर पूरी ताकत झोंकी हुई थी, जबकि अब वे विधायकों के साथ वन टू वन बैठकों में व्यस्त हो गए हैं।
कांग्रेस के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए भाजपा की ओर से कमान मनोहर लाल ने संभाली है। सैनी सरकार बचाने के लिए उन्होंने न केवल जजपा के तीन विधायकों को साधा, बल्कि अब कांग्रेस पर पलटवार के लिए उनके कुछ नाराज नेताओं पर भी नजर बना ली है।
संभावना है कि अगले कुछ दिनों में मनोहर लाल की अगुवाई में कुछ कांग्रेसी नेता भाजपा का दामन थामें। शह और मात के इस खेल में दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्रियों की साख दांव पर लगी है। संयोग की बात है कि दोनों ही नेता अपनी-अपनी पार्टी के हाईकमान के विश्वास पात्र हैं और दोनों ही पार्टियों ने दोनों नेताओं को हरियाणा के लिए फ्री हैंड कर रखा है।
Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में चल रहे लोकसभा चुनाव के शोरगुल के बीच सत्ताधारी पार्टी भाजपा कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंस गई है। तीन निर्दलीय विधायकों को भाजपा से तोड़कर अपने साथ लाकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बड़ा सियासी दांव खेलकर भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है।
हुड्डा के इस दांव से भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है और प्रदेश भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लोकसभा चुनाव के बीच सरकार को संकट से निकालने में जुट गया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल निर्दलीय व जजपा के विधायकों को साध रहे हैं। इससे पहले दोनों नेताओं ने लोकसभा चुनाव को लेकर पूरी ताकत झोंकी हुई थी, जबकि अब वे विधायकों के साथ वन टू वन बैठकों में व्यस्त हो गए हैं।
कांग्रेस के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए भाजपा की ओर से कमान मनोहर लाल ने संभाली है। सैनी सरकार बचाने के लिए उन्होंने न केवल जजपा के तीन विधायकों को साधा, बल्कि अब कांग्रेस पर पलटवार के लिए उनके कुछ नाराज नेताओं पर भी नजर बना ली है।
संभावना है कि अगले कुछ दिनों में मनोहर लाल की अगुवाई में कुछ कांग्रेसी नेता भाजपा का दामन थामें। शह और मात के इस खेल में दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्रियों की साख दांव पर लगी है। संयोग की बात है कि दोनों ही नेता अपनी-अपनी पार्टी के हाईकमान के विश्वास पात्र हैं और दोनों ही पार्टियों ने दोनों नेताओं को हरियाणा के लिए फ्री हैंड कर रखा है।
फ्लोर टेस्ट के बहाने दबाव बनाने की रणनीति
कांग्रेस नेता पहले ही साफ कर चुके हैं कि मात्र तीन माह के लिए वह अपनी सरकार नहीं बनाएंगे। कांग्रेस की रणनीति है कि वह लगातार भाजपा पर फ्लोर टेस्ट के लिए दबाव बनाए और जनता में यह संदेश जाए कि भाजपा सरकार अल्पमत में है।
कांग्रेस लोकसभा चुनाव के साथ आगामी विधानसभा चुनाव में भी इस मुद्दे को भुनाने की फिराक में है। भाजपा के लिए दिक्कत ये है कि तकनीकी तौर पर वह 45 की बजाय 43 सदस्यों के साथ अल्पमत है।
कांग्रेस में गए विधायक लौटने की बात कह रहे, हमने इंतजार करने को कहा : मनोहर लाल
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जो तीन निर्दलीय विधायक कांग्रेस के पास गए हैं, उनमें से कुछ उन्हें फोन करके वापस लौटने की बात कह रहे हैं। लेकिन, हमने थोड़ा इंतजार करने के लिए कहा है।
गन्नौर की नई अनाज मंडी में आयोजित विजय संकल्प रैली में मनोहर ने जजपा विधायकों के साथ बैठक पर कहा कि जजपा के विधायक उनसे मिले और समर्थन देने की बात कर हैं, लेकिन वह राजनीति में हलचल नहीं करना चाहते। उन्होंने कांग्रेस और जजपा पर तंज कसते हुए कहा ये दोनों हमारे नहीं जनता के भंवर में फंसेंगे।
40 पूर्व विधायक भी कांग्रेस के साथ, मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए: हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में भाजपा की सरकार अल्पमत में आ चुकी है। नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। हमने राज्यपाल के पास ज्ञापन भेजा और राष्ट्रपति शासन की मांग की है। जहां तक तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन की बात है तो आने वाला समय कांग्रेस है, विधायकों ने सोच समझकर ही भाजपा से समर्थन वापस लिया है। अकेले निर्दलीय विधायक ही नहीं, 40 पूर्व विधायक भी कांग्रेस के साथ आ चुके हैं।
भाजपा अब भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस को घेरने की तैयारी में
हरियाणा भाजपा ने अब कांग्रेस को घेरने के लिए नई रणनीति बनाई है। पहले जहां भाजपा के प्रत्याशी और स्टार प्रचारक केवल मोदी सरकार का गुणगान करने में जुटे थे, लेकिन तीन निर्दलीयों के समर्थन वापस लेने से अब भाजपाइयों ने कांग्रेस को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है।