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Lok Sabha Election: संगरूर की नारी शक्ति को नहीं मिल रहा नुमाइंदगी का मौका; महिला वोटरों की संख्या है 47 फीसदी

Fri, 10 May 2024 10:40 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, सुनाम ऊधम सिंह वाला

सार

57 वर्ष पहले संगरूर ने ही पंजाब की पहली महिला सांसद के रूप में निरलेप कौर को देश की चौथी लोकसभा में पहुंचाकर इतिहास रचा था। अब देश की 18वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनाव हो रहा है और संगरूर से किसी भी प्रमुख सियासी दल ने महिला चेहरे को मैदान में नहीं उतारा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संगरूर इलाके की महिलाओं के संघर्षमय, क्रांतिकारी और जोशीले जज्बे का कोई सानी नहीं है। विकट से विकट परिस्थितियों में भी कमजोरी को हथियार बनाकर महिलाएं अपने हक के लिए आवाज बुलंद करती रही हैं। 

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आजादी संग्राम में बलिदान से लेकर राजनीति में यहां की नारी शक्ति की भागीदारी अहम मुकाम पर रही है, लेकिन वर्तमान दौर में राजनीति में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के तमाम सियासी दलों के दावे संगरूर संसदीय सीट पर पूरी तरह से खोखले साबित हुए हैं। 57 वर्ष पहले संगरूर ने ही पंजाब की पहली महिला सांसद के रूप में निरलेप कौर को देश की चौथी लोकसभा में पहुंचाकर इतिहास रचा था। अब देश की 18वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनाव हो रहा है और संगरूर से किसी भी प्रमुख सियासी दल ने महिला चेहरे को मैदान में नहीं उतारा है। इस सीट पर महिला वोटरों की संख्या 47 फीसदी है। बावजूद इसके इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पिछले छह दशक से कोई महिला नेता नहीं कर सकी है। इस सीट पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने पुरुष उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारा है।

⁠जिस दौर में महिला को घर की चारदीवारी से बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी, उस दौर में सुनाम की बीबी गुलाब कौर ने सात समुंदर पार जाकर गदरी लहर को प्रचंड किया था। गदरी शहीद बीबी गुलाब कौर बख्शीवाला के बलिदान की गाथा नारी शक्ति के संघर्ष, शौर्य व वीरता की उच्च कोटि की मिसाल है। राजनीति में भी यहां की महिलाओं ने अहम मुकाम हासिल किए हैं। बीबी राजिंदर कौर भट्ठल (जिनके माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और बीबी का जन्म जेल में हुआ था) के जोश ने महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। बीबी भट्ठल, पंजाब की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री व डिप्टी सीएम रही हैं।

विधानसभा में रहा है प्रभाव
लोकसभा में महिलाओं से दूरी रखने वाले सियासी दल, विधानसभा चुनाव में महिलाओं पर भरोसा जताते आ रहे हैं और महिलाएं भी अपना प्रभाव दिखाती रही हैं। विधायक बन महिलाएं पंजाब कैबिनेट में मंत्री तक रह चुकी हैं। ऐसे में सियासी दलों की लोकसभा चुनाव में महिलाओं से दूरी बनाए रखने पर सवाल उठना लाजिमी हैं। राजनीति में सबसे पहला नाम बीबी भट्ठल का है, जो लगातार पांच बार विधानसभा चुनाव जीती हैं। मालेरकोटला विधानसभा सीट से तीन बार चुनाव जीतने वाली रजिया सुल्ताना कैबिनेट मंत्री रही हैं। फरजाना आलम, मुख्य संसदीय सचिव रही हैं। हरचंद कौर घनौरी विधायक रही हैं, नरिंदर कौर भराज वर्तमान विधायक हैं। इसके अलावा परमेश्वरी देवी अरोड़ा, सोनिया अरोड़ा, दामन थिंद बाजवा, फरजाना आलम भी विस चुनाव मैदान में उतर चुकी हैं।

भाजपा ने तीन, शिअद ने एक, कांग्रेस ने दो महिलाओं को बनाया उम्मीदवार
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिये तमाम सियासी दल, महिलाओं की राजनीति में भागीदारी का सपना देख रहे हैं, लेकिन टिकट देने के अब तक के रुझान ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी नारी शक्ति को लंबा इंतजार करना होगा। जब तक कानून जमीन स्तर पर नहीं आता तब तक महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ सकेगी। पंजाब की बात की जाए तो भाजपा ने तीन सीटों पटियाला सीट से परनीत कौर, होशियारपुर से अनीता सोम प्रकाश और बठिंडा से पूर्व आईएएस अधिकारी परमपाल कौर सिद्धू को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने फरीदकोट से अमरजीत कौर को और होशियारपुर से यामिनी गोमर पर दांव खेला है। बठिंडा से अकाली दल ने हरसिमरत कौर बादल को चौथी बार उतारा है। पंजाब से परनीत कौर व हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुकी हैं। हरबंस कौर भिंडर व बीबी परमजीत कौर गुलशन सांसद निर्वाचित हो चुकी हैं। मौजूदा लोकसभा में महिलाओं की कुल भागीदारी 14.94 फीसदी है और राज्यसभा में 14.05 फीसदी है, जोकि 33 फीसदी आरक्षण के मुकाबले आधा भी नहीं है। पंजाब विधानसभा में 13 महिला विधायक हैं, जिनमें 11 विधायक आप के हैं और कैबिनेट में दो महिला नेता मंत्री हैं। कांग्रेस और अकाली दल से एक-एक महिला विधायक हैं। संगरूर सीट से 57 वर्ष पहले निरलेप कौर पंजाब की पहली महिला सांसद चुनी गईं थीं।

यह तय करेंगे भविष्य...1.01 करोड़ महिला और 1.12 करोड़ पुरुष वोटर
पंजाब में कुल वोटरों की संख्या 2,14,21,555 है। इसमें 1,12,67, 019 पुरुष वोटर, 1,01,53,767 महिला और 769 ट्रांसजेंडर हैं। एक करोड़ से अधिक महिला मतदाता प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला करेंगी। 
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पिछले के मुकाबले इस बार अधिक हुई महिला मतदाताओं की संख्या
पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या इस बार अधिक हो गई है। वर्ष 2019 में राज्य में कुल 98 लाख 29 हजार 916 महिला मतदाता थीं। इस बार 5,28,864 वोटर 18-19 साल के आयु वर्ग के हैं, जो पहली बार वोट डालेंगे। इनमें 3,16,670 लड़के, 2,12,178 लड़कियां और 16 ट्रांसजेंडर हैं।
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