हरियाणा में तीन महीने के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों ने भी कमर कसना शुरू कर दी है। वहीं, लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार भी अंदरखाते चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें भाजपा समेत अन्य दलों के नेता शामिल हैं।
विधानसभा की टिकट चाहने वालों में भाजपा के वे नेता भी हैं, जिन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला था। ये सभी शीर्ष नेतृत्व के साथ संपर्क में होने के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र में भी सक्रिय हो गए हैं। भाजपा के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे अरविंद शर्मा, अशोक तंवर, बंतो कटारिया और रणजीत चौटाला विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। ये सभी सक्रिय हैं और पार्टी के कार्यक्रमों में जोर-शोर से शामिल हो रहे हैं।
शर्मा रोहतक या सोनीपत की ब्राह्मण बहुल्य सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। हालांकि उनके बेटे भी पिछले कुछ दिनों से सक्रिय हो गए हैं। कार्यक्रमों में वह देखे जा रहे हैं। वहीं, तंवर भी तैयारी में जुटे हैं और अपने लिए रिजर्व सीट तलाश रहे हैं। रणजीत चौटाला का भी विधानसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव लड़ने से पूर्व वह रानियां से विधायक रहे हैं। वह इस विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक थे, मगर लोकसभा चुनाव के दौरान वह भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं, बंतो कटारिया भी सक्रिय हैं। वह भी यमुनानगर की एक रिजर्व सीट से लड़ने की इच्छुक हैं।
लोकसभा में जिन्हें टिकट नहीं मिला वो भी लाइन में
भाजपा के वे नेता भी लाइन में हैं, जिन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था। इनमें सुनीता दुग्गल, संजय भाटिया और रमेश कौशिक भी शामिल हैं। पिछले दिनों सुनीता दुग्गल नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मिलकर आई हैं। भाटिया भी लगातार प्रदेश के साथ केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में हैं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व टिकटों के वितरण में इस बार कोई भी कमजोर कड़ी नहीं छोड़ना चाहेगा। चाहे स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो या समीकरणों की बात हो। वहीं, चुनाव विश्लेषक सतीश त्यागी का कहना है कि लोकसभा चुनाव अब पांच साल बाद ही होंगे। तब तक के लिए ये लोग प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं। इसलिए विधानसभा चुनाव उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है।
ये भी लड़ सकते हैं चुनाव
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुशील गुप्ता भी विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। वह कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस-आप के साझा उम्मीदवार थे। कांग्रेस के दिव्यांशु बुद्धिराजा भी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर ने विधानसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि वह पिछले 25 सालों से केंद्र की राजनीति करते आए हैं, ऐसे में वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगे। राव दान सिंह का चुनाव लड़ना तय है। वह इस समय विधायक भी हैं। उधर इनेलो के अभय चौटाला और जजपा की नैना चौटाला का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है।