कार्यकर्ताओं से बात करतीं जसमा देवी।
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पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल की राजनीतिक विरासत बचाने के लिए आखिरकार उनकी पत्नी जसमा देवी को कमान संभालनी पड़ी। पूर्व विधायक 76 वर्षीय जसमा देवी अपने पोते भव्य बिश्नोई का भविष्य सुरक्षित करने के लिए आदमपुर के चुनावी रण में मोर्चे पर डट गई हैं। परिवार के राजनीतिक इतिहास में पहली बार भगवा टोपी सिर पर है।
कांग्रेस समेत अन्य दल भजन लाल के गढ़ को भेदने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं। कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश (जेपी) को मैदान में उतारा है। मुकाबला कड़ा होता देख जसमा देवी ने स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद खुद मंडी आदमपुर में डेरा जमा लिया है और कार्यकर्ताओं से रूबरू होते हुए पल-पल का फीडबैक ले रही हैं।
जसमा देवी चौधरी भजन लाल की पुश्तैनी आढ़त की दुकान नंबर 107 पर आने वाले कार्यकर्ताओं से चुनाव के बारे में बात करती हैं। सभी को एक ही बात कहती हैं, थारा पोत्र थारे हवाले। इसको अच्छी वोटों से जिताना है। अपने कार्यकर्ताओं को पुराने कार्यकर्ताओं और भजन लाल के साथ रहे गांवों और परिवारों की भी याद दिलाकर वहां जाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
जसमा देवी के मैदान में उतरने का कारण साफ है कि यह चुनाव केवल भाजपा का न होकर भजन लाल परिवार की विरासत से भी जुड़ा है। इसी चुनाव से 2024 के आम चुनावों की दिशा तय होगी। हर बार मंडी ही आदमपुर के चुनाव का परिणाम तय करती आई है। इस बार मंडी के मतदाताओं की खामोश को देखते हुए जसमा देवी खुद मंडी के मतदाताओं से संपर्क साध रहीं हैं। अपनी परंपरागत सीट को बचाने के लिए कुलदीप बिश्नोई, रेणुका बिश्नोई पहले ही पसीना बहा रहे हैं।
चुनावी निशान इसलिए पहनी है टोपी
जसमा देवी खुद 1987 से 91 तक आदमपुर से विधायक रहीं हैं और शुरू से ही हलके कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ीं रहीं हैं। जसमा देवी के सिर पर भाजपा के कमल के फूल की टोपी पहनने का भी सियासी मकसद है, क्योंकि अभी तक आदमपुर में भजनलाल और उसका परिवार कांग्रेस और हरियाणा जनहित कांग्रेस के निशान पर वोट लेता रहा है। ऐसे में आदमपुर के लोगों ने कांग्रेस के हाथ और ट्रैक्टर के निशान पर वोट दी है।