महंगाई के असर से रामलीला भी अछूती नहीं है। साज सज्जा से लेकर पोशाक तक के बजट पर कैंची चल चुकी है। राम, रावण, सीता आदि का किरदार निभाने वाले कलाकार अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं। उनकी एक ही इच्छा है कि महंगाई रूपी रावण का दहन हर हाल में होना चाहिए।
महंगाई के कारण पुरानी पोशाक से काम चलाया
महंगाई बहुत बढ़ गई है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। रामलीला के कलाकारों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। कोविड के कारण पहले से परेशान लोगों का महंगाई ने बुरा हाल कर दिया है। रामलीला के कलाकार अपनी ड्रेस नहीं खरीद सके। रावण की पुरानी पोशाक में ही काम चलाया। एक ड्रेस खरीदने पर करीब 10 हजार रुपये का खर्च आता है। इसलिए पुरानी ड्रेस को ही इस्तेमाल किया।
-संजय जखमोला, रावण के किरदार, उत्तरांचल रामलीला मंडली एवं दशहरा कमेटी, सेक्टर-40
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खर्च चलाना मुश्किल, कम होनी चाहिए महंगाई
महंगाई ने रामलीला कमेटियों की हालत खराब कर दी है। कोरोना से पहले हालात कुछ और थे। लोग अच्छा खासा चंदा देते थे। अब महंगाई के कारण चंदे में भी कटौती हो गई है। हर वस्तु के दाम बढ़ गए हैं। कलाकारों की पोशाक बहुत महंगी हो गई हैं। चाहे मेकअप हो या सजावट से जुड़ी अन्य सामग्री, सब पर महंगाई की छाया है। अब इसका अंत होना ही चाहिए।
-आयुष जोशी, राम के किरदार, उत्तरांचल रामलीला मंडली एवं दशहरा कमेटी, सेक्टर-40
हर तरफ महंगाई की मार
महंगाई बहुत है। जरूरत की हर चीजें महंगी हो गई हैं। जीवन चलाना मुश्किल हो गया है। पेट्रोल इतना महंगा हो गया है कि घर से कदम बाहर निकालने से पहले 100 बार सोचना पड़ता है। यही हाल डीजल का भी है। खाद्य तेलों की कीमत में भी अच्छा खासा इजाफा हुआ है। कार के बजाय दुपहिया वाहन पर चलने को लोग मजबूर हैं। महंगाई से छुटकारा जरूरी है।
-कशिश गौतम, सीता के किरदार, उत्तरांचल रामलीला मंडली एवं दशहरा कमेटी, सेक्टर-40
महंगाई के कारण नहीं खरीद पाया नई तलवार
महंगाई के कारण रावण की ड्रेस के लिए कई आइटम नहीं खरीद पाए। कई वस्तुओं में गुणवत्ता से समझौता करना पड़ा। यह सोचकर दिल्ली गया था कि वहां सामान सस्ता मिल जाएगा। लेकिन वहां रावण की पूरी ड्रेस की कीमत 30 हजार रुपये बन रही थी। पहले यही ड्रेस 15 हजार में आती थी। पुरानी तलवार में जंग लग गया है। लेकिन नई खरीदने की हिम्मत नहीं हुई, सो चले आए।
-अनुज चहल, रावण के किरदार, उत्तराखंड युवा समिति, सेक्टर-28
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रामलीला में पहले लोग दिल खोलकर दान देते थे, अब कम हो गए
रामलीला का बजट बढ़ गया। टेंट, साउंड व अन्य सामान महंगे हो गए हैं। सभी की जेब पर कोविड के कारण असर हुआ है। महंगाई काफी बढ़ी है। पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ने से और अधिक परेशानी आई है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया तो सामान के दाम भी बढ़ गए। रामलीला में कई चीजें मै नहीं खरीद पाया। कई पुरानी ड्रेस, तीर, धनुष और तरकश से ही काम चलाना पड़ रहा है। लोग पहले दिल खोलकर दान देते थे, वे भी कम हो गए हैं। इसलिए बहुत दिक्कत है।
-वरुण शर्मा, राम के किरदार, उत्तराखंड युवा समिति, सेक्टर-28
महंगाई के कारण खुद तैयार किए जेवरात
महंगाई की मार बजट पर पड़ी। खुद ही थर्मोकोल से आर्टिफिशियल जेवरात बनाने पड़े। महंगाई के कारण कई चीजें नहीं खरीद पाई। गहनों में मांग टीका, चूड़ी, कानों की बालियां सहित अन्य गहने खुद तैयार किए। कुछ सामान इतना महंगा है कि चंडीगढ़ में नहीं खरीद सकते तो दिल्ली जाना पड़ता है। पहले रामलीला कमेटियों को अच्छा चंदा मिलता था, अब वह भी घट गया है।
-ईक्षा शर्मा, सीता की किरदार, उत्तराखंड युवा समिति, सेक्टर-28
पुरानी ड्रेस और फटी धोती से चला रहा हूं काम
पहले हर वर्ष नई पोशाक खरीदता था। इस बार महंगाई इतनी बढ़ गई है कि नहीं खरीद पाया। कार से स्कूटर पर आ गया हूं। पहले रामलीला में कार से आता था। कुछ कलाकारों को लिफ्ट भी देता था, लेकिन महंगाई ने विवश कर दिया है। इस बार पुरानी ड्रेस से काम चला रहा हूं। फटी धोती को सिलाई कर रामलीला में अभिनय करना पड़ रहा है।
-ज्योति स्वरूप भारद्वाज, रावण के किरदार, ओसीएफ सांस्कृतिक मंच, सेक्टर-29
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महंगाई से हाहाकार
सभी परेशान हैं। महंगाई के कारण घर का बजट बिगड़ा हुआ है। जरूरी खर्चे तो करने ही पड़ेंगे, आखिर कितनी कटौती की जा सकती है। आमदनी महंगाई के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकारों को ही कदम उठाने होंगे। आम आदमी का जीवन इस महंगाई के दौर में दूभर होता जा रहा है। वस्तुओं के दाम काबू से बाहर हैं।
-करण राणा, राम के किरदार, ओसीएफ सांस्कृतिक मंच, सेक्टर-29
राम जी से यही प्रार्थना, कम कीजिए महंगाई
अमीरों को भले ही महंगाई से फर्क न पड़ता हो, लेकिन आम आदमी का जीवन दूभर हो जाता है। अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दिन-रात पसीना बहाने वाले लोगों के बारे में सरकारों को सोचना चाहिए। घर ही नहीं रामलीला कमेटी का बजट भी घट गया है। पुरानी पोशाक से मंचन कर रही हूं। गहने और मुकुट भी नए नहीं खरीद पाई। महंगाई पर लगाम बहुत जरूरी है। श्रीराम से कहूंगी महंगाई कम कीजिए। जीना मुश्किल है।
-शुभ्रा, सीता की किरदार, ओसीएफ सांस्कृतिक मंच, सेक्टर-29
महंगाई ने होश उड़ा दिए
ड्रेस हो या रामलीला का स्टेज या मेकअप, चीजें सभी महंगी हो गई हैं। जोश वही है। लेकिन महंगाई ने होश उड़ा दिए हैं। हमारी आमदनी कम हो गई है। कोविड के कारण लोग परेशान हैं। महंगाई ने जले पर नमक छिड़क दिया है। इसके कारण रामलीला के कलाकार और कमेटियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
-अशोक चौधरी, रावण के किरदार, आजाद ड्रामेटिक क्लब रामलीला एवं दशहरा कमेटी, सेक्टर-20
ड्रेस काफी महंगी हो गई
रामलीला में स्टेज पर मंचन करते समय अलग ड्रेस होती है। वह भी महंगी हो गई है। पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार दोगुने दाम हैं। महंगे दाम देखकर पुरानी ड्रेस से ही काम चलाना पड़ रहा है। पेट्रोल के दाम बढ़ने से जेब पर असर पड़ रहा है। मंचन के लिए आने में ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं।
-राहुल वर्मा, राम के किरदार, आजाद ड्रामेटिक क्लब रामलीला एवं दशहरा कमेटी, सेक्टर-20
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दिल्ली में भी बहुत महंगा हुआ सामान
रामलीला मंचन के लिए ड्रेस व मेकअप के लिए सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। जो सामान पहले दिल्ली में पांच हजार का था, वह अब आठ से नौ हजार का हो गया है। किराया भी बढ़ गया है। सीता की ड्रेस काफी महंगी हो गई है। इस बार नई ड्रेस खरीदनी थी, लेकिन महंगाई के कारण पुरानी ड्रेस से काम चलाना पड़ रहा है। घर से स्टेज जक जाने का पेट्रोल का खर्च भी बढ़ा है। बड़ा कठिन दौर है।
-प्रिया, सीता, आजाद ड्रामेटिक क्लब रामलीला एवं दशहरा कमेटी, सेक्टर-20
इस तरह बढ़ी महंगाई
रसोई गैस
- अक्टूबर सितंबर अगस्त जुलाई जून मई
- 909.32 894.32 869.32 844 818.50 818.50
पेट्रोल (अक्टूबर को छोड़कर हर माह की एक तारीख के रेट)
- अक्टूबर सितंबर अगस्त जुलाई जून मई
- 100.86 97.53 97.93 95.03 90.89 86.99
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डीजल (अक्टूबर को छोड़कर हर माह की एक तारीख के रेट)
- अक्टूबर सितंबर अगस्त जुलाई जून मई
- 93.24 88.48 89.50 88.81 85.04 80.43
सरसों का तेल (फार्च्यून)
- अक्टूबर सितंबर अगस्त जुलाई जून मई
- 190 185 180 177 173 170