हरियाणा के 12 से 15 जिलों में सेना की भूमि लोगों के कब्जे में है। कुछ जगह सरकारी संस्थान भी बन चुके हैं। जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी विवाद है। सेना ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि उसकी जमीन वापस की जाए या फिर उसी मूल्य की जमीन दी जाए। सारे विवादों को निपटाने के लिए शुक्रवार को वित्तायुक्त पीके दास के साथ पश्चिमी कमान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बैठक हुई।
पश्चिमी कमान सेना मुख्यालय के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स मेजर जनरल हरिंदर सिंह, सलाहकार नागरिक सैन्य मामले कर्नल जेएस संधू और क्वार्टर मास्टर भूमि कर्नल भूपिंदर सिंह ने किया। उन्होंने पीके दास के समक्ष सेना की भूमि पर हुए कब्जों, अतिक्रमण व सरकारी संस्थानों के निर्माण का मुद्दा एक-एक कर उठाया।
कुछ जमीनों के मालिकाना हक का राजस्व विभाग व सेना का रिकॉर्ड अलग-अलग पाया गया। दास ने सभी डीसी को निर्देश दिए कि अपने-अपने जिलों में सेना की सभी जमीनों को चिन्हित करें। अतिक्रमण व अवैध कब्जों की शिकार जमीनों के बार में विस्तार से रिपोर्ट बनाकर भेजें ताकि जमीन संबंधी मामले निपटाए जा सकें। अगले माह इस मुद्दे पर फिर बैठक होगी।
कर्नल जेएस संधू ने बताया कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभाग लंबे समय से सेना की भूमि का अनाधिकृत उपयोग कर रहे हैं। लंबे समय सरकार के साथ ये मुद्दे लंबित हैं। इन्हें हल करने के लिए शुक्रवार को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व वित्तायुक्त पीके दास से सौहार्दपूर्ण बैठक हुई। बैठक में जमीनों के स्वामित्व, अनाधिकृत उपयोग और सेना की भूमि के आदान-प्रदान को लेकर लंबी चर्चा हुई। लंबित मुद्दों के समयबद्ध निपटारे के लिए कई उच्च स्तरीय निर्णय लिए गए। उम्मीद है कि जल्द सेना को उसकी जमीनें वापस मिलेंगी।