इस पूरे मामले में आंदोलन के दौरान राज्य सरकार के अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल के लिए यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की अगुवाई में कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 13 मई, 2016 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसमें अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद कई अफसरों पर गाज गिरी थी। कुछ वक्त बाद प्रकाश सिंह कमेटी पर विवाद खड़ा हो गया। इस पर विपक्ष की ओर से कई सवाल खड़े किए गए।
जांच के लिए बना था आयोग
इस मामले में चारों ओर से घिरी भाजपा सरकार ने मामले की जांच के लिए झा आयोग बना दिया। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एसएन झा की अगुवाई में बने इस आयोग का मुख्यालय गुरुग्राम में बनाया गया है। अब इस मामले में झा आयेाग की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
100 से ज्यादा ने दर्ज कराए बयान
आयोग को रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में दंगों से हुए जानमाल के नुकसान का पूरा आंकलन करने, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं और तथ्यों को सार्वजनिक करने को कहा गया था। इसके अलावा सामाजिक ताने-बाने को खराब करने के लिए रचे गए कथित षड्यंत्र को बेनकाब करते हुए सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। आयोग को इस मामले में लिप्त सभी नेताओं, अधिकारियों समेत आम लोगों से पूछताछ करने की छूट भी दी गई थी। सूत्र बताते हैं 100 से ज्यादा लोग इस मामले में आयोग के समक्ष अपने बयान दर्ज करवा चुके हैं।