कर्मचारी चयन आयोग ने यूपी की तर्ज पर नकल करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की सिफारिश की है। फिलहाल ऐसे मामलों में 120बी, 420, 468 की धारा में केस दर्ज किया जाता है। इनमें आरोपियों की जल्दी जमानत हो जाती है। आयोग की मंशा है कि पेपर लीक मामले में गैर जमानती धाराएं लगें और दोषियों को सात साल सजा हो। साथ ही पेपर के खर्च के भुगतान को लेकर दोषी की प्रापर्टी को अटैच किया जाए।
प्रश्न पत्रों के अलग-अलग प्रेस से सेट छपवाए जाएंगे
लीकेज रोकने के लिए आयोग ने अपने स्तर पर भी कई अहम निर्णय लिए हैं। अलग-अलग प्रेस से एक ही पेपर के अलग-अलग सेट तैयार कराए जाएंगे, ताकि परीक्षा से पहले किसी को भनक ही न लग सके कि कौन सा पेपर परीक्षा में दिया जाएगा। दूसरा जो गाडियां परीक्षा केंद्र पर पेपर पहुंचाएंगी, उन पर आरएफडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी डिवाइस) लगाया जाएगा। इससे गाड़ी की लोकेशन पता लगेगी और जिस बाक्स में पेपर बंद होगा, अगर कोई उसको खोलेगा तो तुरंत मुख्यालय में अलर्ट का मैसेज आ जाएगा।
पेपर लीक रोकने को लेकर प्रदेश सरकार और आयोग दोनों स्तरों पर काम चल रहा है। परीक्षा को फुल प्रूफ बनाने को लेकर गंभीरता के साथ मंथन चल रहा है। ऐसी तैयारियां की गई हैं कि भविष्य में पेपर लीक न हो सके। इसके लिए कानून में संशोधन किया जा रहा है। भोपाल सिंह खदरी, चेयरमैन, एसएसएससी।