गुरजंट हॉकी मैदान पर स्ट्राइकर के तौर पर खेलते हैं। उनके नाम पर हॉकी मैच शुरू होने के बाद सबसे कम समय में गोल करने का रिकार्ड दर्ज है। प्रो लीग 20-20 भुवनेश्वर में नीदलैंड के खिलाफ 2020 में सबसे कम समय में गोल किया था। यह रिकार्ड 13 सेकेंड का है। इससे पहले यह रिकार्ड अजीत पाल सिंह के नाम था, जिन्होंने 15 सेकेंड में गोल किया था।
टोक्यो ओलंपिक में 41 साल बाद हॉकी में मेडल जीतने वाली टीम इंडिया के दो सदस्य गुरजंट सिंह और रुपिंदर पाल सिंह चंडीगढ़ स्थित हॉकी अकादमी के ट्रेनी रहे हैं। दोनों ने हॉकी की नर्सरी में करीब पांच से छह साल बिताए और हॉकी की बारीकियों को सीखा। हॉकी अकादमी से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि दोनों खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत के बाद मुकाम हासिल किया है। ओलंपिक मैचों में रुपिंदर पाल सिंह ने चार और गुरजंट ने तीन गोल दागे। दोनों की कामयाबी से हॉकी अकादमी में खुशी का माहौल है। हॉकी अकादमी के प्रमुख कोच गुरमिंदर सिंह ने बताया कि दोनों अपने खेल से अकादमी का नाम रोशन किया है। दोनों खिलाड़ियों पर पूरे देश को गर्व है।
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विश्व का सबसे कम समय में गोल करने का रिकार्ड
गुरजंट सिंह ने सेक्टर-42 स्थित हॉकी अकादमी में साल 2005-2011 तक ट्रेनिंग ली। ट्रायल के बाद गुरजंट सिंह को इस अकादमी में जगह मिली थी। इसी अकादमी में उन्होंने हॉकी स्टिक पकड़नी सीखी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और पहले जूनियर नेशनल टीम में जगह बनाई और इसके बाद जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे। इस ओलंपिक में उनका शानदार प्रदर्शन रहा।
टोक्यो ओलंपिक में गुरजंट ने 3 गोल किए। यह तीनों फील्ड गोल रहे। गुरजंट हॉकी मैदान पर स्ट्राइकर के तौर पर खेलते हैं। उनके नाम पर हॉकी मैच शुरू होने के बाद सबसे कम समय में गोल करने का रिकार्ड दर्ज है। प्रो लीग 20-20 भुवनेश्वर में नीदलैंड के खिलाफ 2020 में सबसे कम समय में गोल किया था। यह रिकार्ड 13 सेकेंड का है। इससे पहले यह रिकार्ड अजीत पाल सिंह के नाम था, जिन्होंने 15 सेकेंड में गोल किया था।
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बॉब के नाम से जाना जाता है रुपिंदर पाल सिंह को
रुपिंदर पाल सिंह चंडीगढ़ हॉकी अकादमी में 2002 के बैच में आए थे। यहां पर हॉकी की कड़ी ट्रेनिंग लेने के बाद बेहतर प्रदर्शन के आधार पर वर्ष 2007 में जूनियर हॉकी टीम में जगह बना ली थी। टोक्यो ओलंपिक में रुपिंदर पाल सिंह का बेहतर प्रदर्शन रहा। इस ओलंपिक में रुपिंदर पाल सिंह ने कुल 4 गोल दागे। इनमें 2 पेनाल्टी कॉर्नर और 2 पेनाल्टी स्ट्रोक के जरिए किए। रुपिंदर टीम में डिफेंडर व ड्रैग फिल्कर के तौर पर खेलते हैं। यह रुपिंदर का दूसरा ओलंपिक हैं। उसे चंडीगढ़ हॉकी अकादमी में ‘बॉब’ के नाम से बुलाते थे।