विजयी चिह्न दिखाते सिमरनजीत सिंह के घरवाले।
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ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक जीत कर 41 साल के बाद इतिहास रच दिया है। इस इतिहास में पंजाब के बटाला के गांव चाहल कलां के रहने वाले सिमरनजीत सिंह का नाम भी सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा, जिसने जर्मनी के खिलाफ दो गोल दाग कर टीम की विजय पताका लहराने में अपना अमूल्य योगदान दिया।
गांव चाहल कलां में सिमरनजीत सिंह के घरवालों ने खूब जश्न मनाया। खुशी में जहां लड्डू बांटे गए, वहीं ढोल की थाप पर पैर भी थिरके। परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। वहीं सिमरनजीत की बहन नवनीत कौर को अपने भाई पर पूरा भरोसा था और सिमरनजीत ने जर्मनी के खिलाफ दो गोल करके भरोसे को कायम रखा।
टीम इंडिया के खिलाड़ी सिमरनजीत सिंह की बहन नवनीत कौर और भाई सतिंदरजीत सिंह ने बताया कि वाहेगुरु ने उनकी अरदासों को फल लगाया है। उन्होंने कहा कि बहुत खुशी है कि टीम इंडिया ने अपना बढ़िया प्रदर्शन कर जर्मनी को हराकर कांस्य पदक जीता। उन्होंने बताया कि उनके भाई सिमरनजीत सिंह ने जर्मनी के खिलाफ दो गोल करके भारत की इस विजय में अपना अहम रोल निभाया है।
सिमरनजीत सिंह के खेल की वजह से केवल देश का ही नहीं बल्कि पूरे गुरदासपुर का नाम रोशन हुआ है। बहन नवनीत कौर का कहना है कि उसका भाई सिमरनजीत सिंह भारतीय टीम के लिए लकी रहे, क्योंकि सिमरनजीत दो मैच नहीं खेले थे और बदकिस्मती से दोनों मैचों में इंडिया की हार हुई थी। उसे पूरा यकीन था कि जर्मनी के खिलाफ अगर उसका भाई खेलेगा तो हिंदुस्तान जरूर जीतेगा और उसकी बात सच हुई। सिमरनजीत के पहले गोल ने पूरी टीम का हौसला बढ़ा दिया। जब दूसरा गोल किया तो पूरे परिवार की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा। बहन ने कहा कि पूरे परिवार को सिमरनजीत सिंह पर गर्व है।
पठानकोट में बांटे लड्डू
उधर, पठानकोट में लायंस क्लब अध्यक्ष राजीव खोसला ने लोगों को लड्डू बांटे और ऐतिहासिक जीत के लिए देशवासियों को बधाई दी गई। राजीव खोसला, पीआरओ नरेंद्र महाजन एवं चेयरमैन प्रोजेक्ट विजय पासी ने कहा कि 41 वर्ष के बाद ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने जीत हासिल की और मजबूत मानी जाने वाली जर्मनी की टीम को हराकर कांस्य पदक जीता।