स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को निशुल्क किताबें मुहैया कराने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है। इस बार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। दिसंबर तो दूर मार्च-अप्रैल तक टेंडर नहीं हुआ और मई में विभाग ने बच्चों को किताबें मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिए। बच्चों को 200-300 रुपये किताबें खरीदने के लिए देने की घोषणा तो की गई, लेकिन उनके खातों में राशि आज तक नहीं पहुंची।
बाजार में किताबें नहीं, कहीं छापकर दे रहे तो रेट दोगुना
शिक्षाविद् सीएन भारती व बच्चों के अभिभावक रमेश मलिक, नीना सिंह, धर्म सिंह बिश्नोई ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद पहली से आठवीं कक्षा तक की सरकारी स्कूलों की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। इस बार विभाग की गलती का अभिभावकों व बच्चों को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा। 20-30 फीसदी बच्चों ने तो किताबें पुराने विद्यार्थियों से जुटा लीं, लेकिन अन्य को प्रकाशकों से संपर्क कर छपवानी पड़ रही हैं, जिनकी कीमत पांच सौ से सात सौ रुपये पड़ रही है।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति
नवंबर 2020 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पक्के जेबीटी 6217, मुख्य शिक्षक 842, टीजीटी 10225, मौलिक मुख्याध्यापक 2365, लेक्चरर 12960, मुख्याध्यापक 676, प्रिंसिपल 991 कम हैं। यह कुल संख्या 34276 बनती है। कार्यरत 5000 गेस्ट जेबीटी, 6000 टीजीटी, 2000 गेस्ट पीजीटी व 800 तदर्थ शिक्षकों के पदों को भी भरा हुआ मान लिया जाए तब भी 20476 पद खाली रह जाते हैं।
शिक्षकों की भर्ती चल रही, बाजार में तीस फीसदी किताबें उपलब्ध : कंवर पाल
शिक्षा मंत्री कंवर पाल का कहना है कि विभिन्न श्रेणी के पदों को भरने के लिए कर्मचारी चयन आयोग के जरिए भर्ती प्रक्रिया जारी है। जेबीटी लगभग पूरे हैं। अन्य श्रेणी के शिक्षकों की कमी जल्दी दूर हो जाएगी। पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए तीस फीसदी किताबें बाजार में उपलब्ध थीं। अन्य को पुराने छात्रों व प्रकाशकों से दिलाने का प्रयास जारी है।