पंजाब सरकार को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पंजाब यूनिवर्सिटी कानून संशोधन बिल-2023 को बिना मंजूरी के वापस भेजा दिया है। पहले की ही तरह राज्यपाल ही पंजाब के सभी विश्वविद्यालयों के चांसलर बने रहेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पंजाब यूनिवर्सिटी कानून संशोधन बिल-2023 को बिना मंजूरी के वापस भेजकर पंजाब सरकार को झटका दिया है। पहले की ही तरह राज्यपाल ही पंजाब के सभी विश्वविद्यालयों के चांसलर बने रहेंगे। इस बिल को पंजाब सरकार ने पिछले साल जून में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मंजूरी दी थी।
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गौरतलब है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज फरीदकोट के कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल और सीएम के बीच टकराव के बाद ही पिछले साल पंजाब विधानसभा द्वारा ये विधेयक पारित किया गया था।
कई माह लटके रहे थे बिल
पंजाब सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर पंजाब यूनिवर्सिटी संशोधन बिल 2023 समेत कुल चार बिल पास किए थे। उसके अनुसार राज्य के सभी 11 विश्वविद्यालयों के चांसलर की शक्तियां गवर्नर से छीनकर मुख्यमंत्री को देने की बात कही गई थी। राज्यपाल ने जून माह के सत्र को अवैध घोषित करार दिया था, जिसके बाद से कई महीनों तक बिल लटके रहे।
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सर्वोच्च न्यायालय का किया रुख
पंजाब सरकार के सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के बाद नवंबर में न्यायालय ने जून 2023 के सत्र को संवैधानिक रूप से वैध घोषित कर दिया था और राज्यपाल से चार विधेयकों पर निर्णय लेने को कहा गया था। इसके बाद ही राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने दिसंबर 2023 में सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक 2023 और पंजाब पुलिस (संशोधन) विधेयक 2023 के साथ ही इस विधायक को भी अनुच्छेद 200 के तहत राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख लिया था। इन विधेयकों को विचार के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, लेकिन बताया जा रहा है कि अब राष्ट्रपति की तरफ से विश्वविद्यालयों से संबंधित विधेयक में किए गए संशोधनों को अपनी मंजूरी नहीं दी गई है।