चंडीगढ़। पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने विश्व आईबीडी (इंफ्लामेटेरी बॉवेल डिसीज) दिवस पर वीरवार को मरीजों के साथ शाम का समय व्यतीत किया। डॉक्टरों ने 250 मरीजों के साथ चर्चा की और उन्हें आंतों का अल्सर कही जाने वाली आईबीडी के बारे में जानकारी दी। मरीजों को आईबीडी के शुरुआती लक्षणों, कारणों, बीमारी के दौरान खान-पान, रहन-सहन और दवाओं के बारे में चर्चा की। इससे पहले दिन में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने पत्रकार वार्ता भी आयोजित की और कार्यक्रम की जानकारी दी।
पीजीआई की गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की प्रोफेसर ऊषा दत्ता ने बताया कि इस बीमारी में शौच में खून आने, पेट दर्द, बार-बार शौच की समस्या अधिक रहती है। पुरुष, महिलाओं, युवा सभी पर इसका एक समान प्रभाव रहता है। बीमारी के लक्षण दिखने पर जरूरी है कि समय पर मरीज अस्पताल पहुंचकर इसका इलाज करवाएं। वर्ष में कम से कम मरीज दो बार डॉक्टर को दिखाएं और सलाह लें। अधिकतम मामलों में मरीज शुरुआती इलाज लेते हैं और थोड़ी सेहत सही होने पर इलाज को बीच में छोड़ देते हैं और डॉक्टर को नहीं दिखाते हैं। ऐसे मामलों में बीमारी दोबारा से शुरू हो जाती है और इलाज लंबा चलता है।
देसी दवाओं में समय व सेहत नहीं करें खराब
डॉ. ऊषा ने बताया कि बीमारी व्यक्ति की रोग-प्रतिकार प्रणाली (शरीर की सुरक्षा प्रणाली) की असामान्य गतिविधि के कारण होता है। शरीर का संतुलन बिगड़ने पर बीमारी होती है, इसलिए हम मरीजों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इसकी सलाह देते हैं। वर्तमान में फास्ट फूड अधिक और घर का खाना कम कर दिया है, इसलिए आंतों की बीमारी बढ़ रही है। डॉ. विशाल ने बताया कि मरीजों को हम सलाह देते हैं कि इस बीमारी का देसी इलाज नहीं है इसलिए घर पर इलाज में समय बर्बाद नहीं करें और समय पर डॉक्टर की सलाह लें, जिससे गंभीरता से बचाव हो सके। इसके साथ ही बिना एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह के केमिस्ट दुकानों से दवाइयां नहीं लें। आनुवांशिक और प्रदूषित पर्यावरण के कारण भी बीमारी हो सकती है।
हर महीने 30 नए मरीज मिल रहे
डॉ. विशाल ने बताया कि पीजीआई में अभी हमारे पास आईबीडी के कुल 1500 के करीब मरीजों का इलाज चल रहा है। हर महीने लगभग 30 मरीज नए आते हैं। पीजीआई में आने वाले मरीजों में हमने देखा है कि 20 उम्र वर्ग से लेकर 40 उम्र के लोगों में यह बीमारी अधिक है।
आईबीडी कार्ड किया लांच
पीजीआई की गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी की टीम की ओर से आईबीडी दिवस पर मरीजों की सुविधा के लिए वीरवार को आईबीडी कार्ड लांच किया गया। इसमें मरीज के लक्षणों, दवाओं इत्यादि का रिकॉर्ड रखा जाएगा। जिससे अगर भविष्य में मरीज पीजीआई के अलावा देश के किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए जाता है तो उसे समस्या नहीं आएगी। डॉक्टर कार्ड देखकर मरीज के इलाज की हिस्ट्री देख सकते हैं।