चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में इन दिनों अधिकारियों की कमी है, इसलिए पहली बार शहर में दानिक्स (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन एवं दीव तथा दादरा और नगर हवेली सिविल सेवा) कैडर के अधिकारी बुलाए गए हैं। गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिल्ली के तीन अधिकारियों को चंडीगढ़ में तैनात किया है। ये तीनों अधिकारी दानिक्स कैडर के हैं, जो अब चंडीगढ़ में सेवाएं देंगे।
बता दें कि चंडीगढ़ प्रशासन में अफसरों की कमी का मामला अमर उजाला ने 17 फरवरी के अंक में प्रमुखता से उठाया था। केंद्र सरकार की तरफ से जारी किए आदेश में वर्ष 2009 बैच के दानिक्स अधिकारी डी. कार्तिकेयन, 2010 बैच के अखिल कुमार और अमित कुमार शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने गुरुवार को तुरंत प्रभाव से इन अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए। फिलहाल शहर में अधिकारियों की कमी के चलते कई अधिकारियों पर अतिरिक्त विभागों का कार्यभार है। इसके चलते प्रशासन का काम भी प्रभावित हो रहा है। अब इन अधिकारियों के ज्वाइन करने के बाद ही सही रूप से विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकेगी।
आमतौर पर केंद्र सरकार से एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी ही चंडीगढ़ में भेजे जाते थे। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर अधिकारी बुलाए जाते रहे हैं लेकिन पहली बार केंद्र सरकार ने दानिक्स कैडर के अधिकारियों को चंडीगढ़ में तैनात किया है। अगले एक हफ्ते के अंदर ये अधिकारी पद संभालेंगे। इन्हें कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जा सकते हैं।
बता दें कि दानिक्स कैडर के अधिकारियों का भी चयन यूपीएससी परीक्षा के माध्यम से ही होता है। इस सेवा के अधिकारी भी यूपीएससी की वही सिविल सर्विस परीक्षा पास करते हैं, जिसके जरिए आईपीएस, आईएएस या आईएफएस के तौर पर अधिकारियों को चुना जाता है। इनको मेरिट लिस्ट में मिले अंकों के आधार पर सेवा आवंटित की जाती है।
प्रशासन में 60:40 का अनुपात जरूरी नहीं
अधिकतर शहरवासियों को लगता है कि प्रशासन में अधिकारियों के बीच 60:40 का अनुपात होना, एक नियम है और इसका पालन करना जरूरी है, जबकि ये सच नहीं है। वर्तमान में चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब, हरियाणा, एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी सेवाएं दे रहे थे, जिनमें अब दानिक्स कैडर के अधिकारी भी जुड़ गए हैं। इनकी संख्या का अनुपात निकाला जाए तो समझ आता है कि 60:40 का अनुपात अनिवार्यता नहीं है। केंद्र सरकार को भी यह बात मालूम है, इसलिए पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एसबी चव्हाण ने संसद में एक प्रश्न के जवाब में कहा था कि पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 में कहीं पर भी यह प्रावधान नहीं है कि चंडीगढ़ में पदों को भरने के लिए पंजाब व हरियाणा से किसी अनुपात में कर्मचारियों को भर्ती किया जाएगा।