अपनी ही पार्टी में घिरते गए दुष्यंत
साढ़े चार साल पहले दुष्यंत चौटाला को डिप्टी सीएम बनाया गया था और जेजेपी को 11 विभाग दिए गए थे लेकिन दुष्यंत चौटाला तमाम विभाग अपने पास रखे। अनूप धानक को राज्यमंत्री के तौर पर शामिल किया गया। इससे पार्टी के अन्य विधायकों में नाराजगी बढ़ गई। पार्टी में बढ़ते विरोध को देखते हुए देवेंद्र बबली को बाद में मंत्री बनाया गया। नारनौंद से विधायक रामकुमार गौतम और नरवाना विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा खुलकर इस बात की मुखाफत करते रहे लेकिन दुष्यंत चौटाला विधायकों की नाराजगी दूर करने में कामयाब नहीं रहे।
बजट सत्र में सीएम ने दिए थे संकेत, नहीं समझ पाए दुष्यंत
बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन में संकेत दे दिए थे कि अब गठबंधन नहीं चलेगा, हालांकि तमाम घटनाक्रम के बावजूद जजपा भाजपा के इस गुप्त प्लान से अनभिज्ञ रही। एक तो जजपा द्वारा पर्ची नहीं देने पर भी भाजपा की ओर से जजपा विधायक रामकुमार गौतम को दो बार बुलवाया गया और दोनों बार गौतम ने दुष्यंत के खिलाफ मोर्चा खोला था और अकेले सभी विभाग लेने पर सवाल उठाए थे। दूसरा, एक्साइज पालिसी में प्लास्टिक की बोतलें बंद करने के दुष्यंत के फैसले को सीएम ने पलट दिया था।