बीमा कंपनियों के लिए घाटे का सौदा
सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हरियाणा में सख्ती की वजह से बीमा कंपनियों को किसानों को मुआवजा समय पर देना पड़ता है। अगर मुआवजे में आनाकानी होती है तो सरकार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी करती है। हरियाणा में बीमा कंपनियों को हर साल करोड़ों रुपये किसानों को मुआवजा देना पड़ता है। ऐसे में राज्य में फसलों का बीमा करने वाली एक कंपनी 1300 से 1400 करोड़ घाटे में चल रही है। इसी तरह से एक और कंपनी की स्थिति ठीक नहीं है।
उधर, तीन साल से किसानों के करोड़ों रुपये के मुआवजे लटके
एक तरफ किसानों को अच्छा मुआवजा मिल रहा है, वहीं कई किसानों के पैसे तीन साल से लटके हैं। कृषि विभाग के मुताबिक इसका मुख्य कारण बैंको का विलय, किसानों द्वारा आधार जोड़ा नहीं जाना और राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) अस्वीकृत होना है। कृषि विभाग के मुताबिक साल 2020-21 में 19.69 करोड़, 2021-22 में 13.68 करोड़ और 2022-23 में 1270.39 करोड़ बकाया है। तीन साल यह कुल राशि 1303.76 करोड़ रुपये बनती है। विभाग की ओर से बताया गया है कि बकाया क्लेम के किसानों की सूची राज्य के उपकृषि निदेशकों के साथ साझा किया गया है, ताकि संबंधित किसान अपने खाते को अपडेट करवाकर भुगतना करवा सके।
इन जिलों को इतना मुआवजा बकाया
| अंबाला |
दो लाख 16 हजार |
| भिवानी |
246 करोड़ 65 लाख |
| चरखी दादरी |
37 करोड़ 27 लाख |
| हिसार |
154 करोड़ 29 लाख |
| फतेहाबाद |
5 करोड़ 31 लाख |
| रेवाड़ी |
28 करोड़ 66 लाख |
| पंचकूला |
एक करोड़ 74 लाख |
| सिरसा |
756 करोड़ 20 लाख |
| मेवात |
64 करोड़ 34 लाख |
| यमुनानगर |
92 लाख 81 हजार |
| रोहतक |
एक करोड़ 36 लाख |
| कैथल |
64 लाख 60 हजार |