वहीं सुप्रीमकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश तो जारी कर दिए कि पराली न जलाने वाले किसान को प्रति क्विंटल 100 रुपये दिए जाएं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश भी किसानों को गवारा नहीं है। बेशक किसी तरह से दबाव बनाकर कृषि विभाग की ओर से उक्त आदेशों के तहत किसानों के फार्म भरे जा रहे है, लेकिन इसके बावजूद जिले भर में अब तक 60 फीसदी से अधिक पराली को आग लगाई जा चुकी है और पराली जलाने का सिलसिला अभी भी जारी है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले में इस साल 1.75 लाख हेक्टेयर में फसल की बिजाई की गई थी और प्रशासन की लाख कोशिश के बावजूद अभी तक एक लाख हेक्टेयर से अधिक धान की पराली को आग लगाई जा चुकी है।
प्रदूषण एक्ट के आर्टिकल 15 से होगा हल: डॉ. बराड़
जिला मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जसविंदर सिंह बराड़ का कहना है कि किसानों पर धारा 188 के तहत किए जा रहे केसों का किसानों पर कोई फर्क नही पड़ रहा है। उनका कहा कि सरकार अपने स्तर पर आदेश जारी करे, जिसके तहत पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ प्रदूषण एक्ट के आर्टिकल 15 के तहत केस दर्ज किया जाए जो कि गैर जमानती अपराध है। इसके साथ ही आरोपी किसान का बिजली कनेक्श्न काटने समेत उसे मिलने वाली हर प्रकार की सब्सिडी बंद की जानी चाहिए।