चंडीगढ़। वार्डों के आरक्षण से बदले समीकरणों के बीच अब चुनावी उठापटक शुरू होगी। टिकटों के लिए स्वयं या अपने करीबियों को दावेदार बनाने की होड़ मचेगी। आम आदमी पार्टी में पहले ही नए और पुराने कार्यकर्ताओं को लेकर घमासान मचा हुआ है। अब टिकट नहीं मिलने पर अन्य पार्टियों में भी रूठने और मनाने का दौर शुरू चलेगा।
मनीमाजरा की तीनों सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने से अब पार्टियों को नए दावेदार ढूंढने होंगे। हालांकि भाजपा अपने मंडल अध्यक्ष को लेकर आश्वस्त है, लेकिन अन्य पार्टियां भी इसे अपने लिए एक बेहतर मौका मानकर चल रही हैं। कांग्रेस ने भी इन सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी का दावा ठोक दिया है। उधर, आप में पुराने कार्यकर्ताओं ने एक दिन पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी दे दी है कि पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया तो परिणाम ठीक नहीं होगा। इसकी गूंज दिल्ली और पंजाब तक पहुंच चुकी है। ऐसे में पार्टी को टिकट बंटवारे में काफी फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा।
शिरोमणि अकाली दल अन्य पार्टियों के टिकट बंटवारे पर नजर रखे हुए है। पार्टियों में उठने वाली बगावत को चिंगारी बनाकर शिअद इस चुनाव में उतरने की तैयारी में है। ऐसे में इस बार का नगर निगम चुनाव का उठापटक भरा हो सकता है।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों की स्थिति
वार्ड कुल मतदाता एससी मतदाता (प्रतिशत में)
16 27664 71.17
26 27654 50.55
19 35922 39.66
31 39887 29.90
28 28972 26.97
7 45739 24.52
24 26329 23.52
सेक्टर टूटने से कई नेताओं को नुकसान, बनानी होगी फिर रणनीति
मनीमाजरा क्षेत्र के तीनों पार्षद विनोद अग्रवाल और जगतार सिंह जग्गा के वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं। वहीं, पार्षद राजेश कालिया की सीट एससी महिला के खाते में और डड्डूमाजरा की पार्षद फर्मिला देवी की सीट एससी खाते में चली गई है। कांग्रेस पार्षद देवेंदर सिंह बबला का वार्ड महिला के लिए आरक्षित हो गई है। पार्षद राजेश गुप्ता बिट्टू की भी सीट महिला खाते में चली गई है। वहीं, चंद्रावती शुक्ला का वार्ड भी एससी के लिए तय हो गया है। भरत कुमार का वार्ड एससी महिला जबकि शक्तिप्रकाश देवशाली, आशा जसवाल और सतीश कैंथ के वार्ड के कई हिस्से टूटने और वार्डों के आरक्षण से इन नेताओं के लिए मुश्किल हो गई है।
भाजपा व कांग्रेस के इन नेताओं पर कोई असर नहीं
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, मेयर रविकांत शर्मा, देवेश मोदगिल, महेश इंदर सिंह सिद्घू, दलीप शर्मा, कंवरजीत राणा को नए वार्डों के बनने से खास नुकसान नहीं हुआ है। इनके वार्ड से टूटे हिस्से भी अब इनके पक्ष में ही हैं। इस कारण इनके पास फिर एक मौका बन गया है। हालांकि महेश इंदर सिंह सिद्घू के वार्ड में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रमुखी शर्मा पहले 10 साल तक पार्षद रह चुके हैं, इसलिए यहां टक्कर अच्छी मिलने के आसार हैं। उधर, वार्ड 16 फिर से एससी आरक्षित होने से शीला फूल सिंह के लिए मौका बना है। वहीं रविंदर कौर गुजराल और गुरबख्श रावत के लिए भी फिर से मौका बना है। दोनों के लिए पुराने समीकरणों के अनुसार महिला वार्ड होने से मदद मिलेगी।