पंजाब में हजारों करोड़ के ड्रग रैकेट केस की सुनवाई फिर स्थगित कर दी गई है। अब इस मामले की सुनवाई छह दिसंबर को तय की गई है। अगली सुनवाई पर यह फैसला लिया जा सकता है कि हाईकोर्ट में बीते तीन साल से रखी सीलबंद रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए या नहीं।
गुरुवार को जस्टिस एजी मसीह एवं जस्टिस संदीप मोदगिल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई शुरू होते ही अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा इस मामले में उन्हें भी पक्ष बनाए जाने की अर्जी पर चर्चा हुई। मजीठिया की इस अर्जी का पंजाब सरकार ने कड़ा विरोध किया।
पंजाब सरकार ने इस मामले की पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दावे को नियुक्त किया है। दुष्यंत दावे ने मजीठिया की इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि इस पड़ाव पर मजीठिया को कैसे इस मामले में पक्ष बनाया जा सकता है। उन्होंने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि इस अर्जी को खारिज किया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने फिलहाल सुनवाई छह दिसंबर तक स्थगित कर दी है।
मजीठिया ने अपनी अर्जी पर क्या कहा था
बिक्रम मजीठिया ने अपनी अर्जी के माध्यम से कहा कि इस मामले में लगातार उनका नाम जोड़ा जा रहा है। यह सब कांग्रेस अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। विधानसभा चुनाव करीब होने के कारण ऐसा बार-बार किया जा रहा है।