पंजाब में अवैध खनन रोकने के लिए पंजाब सरकार द्वारा गठित इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने फैसला किया है कि पूरे राज्य में खनन साइटों की ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी। इस संबंध में ईडी के अधिकारियों की एक बैठक इसी हफ्ते बुलाई गई है, जिसमें कार्य योजना की रूपरेखा तय होगी।
उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने डीआईजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में इस साल मार्च में जलस्त्रोत विभाग के माइनिंग व जियोलॉजी विंग के तहत ईडी की स्थापना की थी। इस डायरेक्टोरेट को राज्य की अंतरराज्यीय सीमाओं और अवैध तरीके से छोटे खनिजों की आवाजाही पर रोक लगाने का काम भी सौंपा गया था। खनन विभाग के अधिकारी इस काम में डायरेक्टोरेट को सहयोग करने के लिए बाध्य हैं। इसके साथ ही अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ माइंस एंड मिनरल (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट 1957 के तहत कार्रवाई का अधिकार भी डायरेक्टोरेट को दिया गया है। डायरेक्टोरेट अवैध खनन रोकने के लिए अपने स्तर पर जासूसी तंत्र भी विकसित करने का अधिकार रखता है।
बुधवार को डायरेक्टोरेट के अधिकारियों ने बताया कि सात सरकारी माइनिंग ब्लाकों के अलावा मोहाली, रोपड़, होशियारपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, लुधियाना, नवांशहर, जालंधर, फिरोजपुर, संगरूर और बठिंडा में खनन साइटों पर अवैध खनन रोकने के लिए खनन विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए अब डायरेक्टोरेट ने राज्य में सभी खनन साइटों पर नियमित रूप से नजर रखने का फैसला किया है। इसके लिए ड्रोनों की मदद ली जाएगी।
उन्होंने बताया कि आमतौर पर खनन साइटों पर रात के समय अवैध खनन होता है। हालांकि राज्य सरकार ने सूबे में शाम 7.30 से सुबह 5 बजे तक खनन गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। ड्रोन के जरिए प्रत्येक साइट की अंतिम स्थिति पर अगली ही सुबह जांच होगी कि और खनन साइट की अंतिम स्थिति में कोई बदलाव नजर आया तो संबंधित इलाके में दोषियों की धरपकड़ का काम शुरू हो जाएगा।
राज्य सरकार अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य से ईडी की स्थापना हुई है। अवैध माइनिंग अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी। -सुखबिंदर सिंह सरकारिया, जल स्त्रोत, माइनिंग एंड जियोलॉजी विभाग के मंत्री