चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ एंथ्रोपोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जेएस सहरावत को एसईआरबी-डीएसटी की ओर से अमेरिकन अकेडमी ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज कॉन्फ्रेंस (एएएफएस), सिऐटल, यूएसए में शोध पत्र पेश करने के लिए ग्रांट मिली है। डॉ. सहरावत 21 फरवरी से 25 फरवरी तक आयोजित कांफ्रेंस में एंथ्रोपोलॉजी क्षेत्र में शोध और तकनीकों पर प्रस्तुति देंगे। डॉ. सहरावत ने बताया कि अमेरिका में 1857 की क्रांति पर अजनाला, अमृतसर में कुएं की खुदाई से मिले कंकाल और दांतों पर किए शोधपत्र को पेश करूंगा और उसमें अपनाई गई नई शोध तकनीकों पर चर्चा की जाएगी।
डॉ. सहरावत ने बताया कि अजनाला में की गई शोध में नई तकनीकों के माध्यम से सैनिकों के कंकालों पर कई खुलासे किए गए हैं। 1857 की क्रांति के समय के सैनिकों के मिले कंकालों में हड्डियों व दांतों में कैल्शियम व फॉस्फोरस की मात्रा अधिक मिली है। दांतों में हाइपो प्लेजिया बीमारी मिली है, जो तनाव से होती है। तनाव अधिक होता है तो दांतों पर लकीरें बन जाती हैं। यह तनाव इनको किशोरावस्था में रहा है। उन्होंने 282 सैनिकों के मिले 9500 दांतों में से 4500 दांतों की जांच की। हड्डियों की भी जांच की गई। इन सैनिकों के दांतों में ऐसे निशान नहीं मिले हैं, जिसके जरिए यह कहा जा सकता है कि वे नॉन वेजिटेरियन थे। वेज और नॉनवेज खाने वाले लोगों के दांतों में दबाव का अंतर आ जाता है, यानी नॉनवेज खाते समय दबाव अधिक लगता है, जिससे दांत घिसते हैं और नुकीले होते हैं। इसके साथ ही सैनिकों के सामने के दो-तीन दांतों की परत भी उतरी हुई मिली है, जिससे साबित होता है कि यह बारूद व गोला की तार तोड़ते थे।