वकालत की शुरुआत करने वाले युवाओं को प्रथम तीन वर्ष के दौरान वित्तीय सहायता की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा और विवेक तिवारी ने हाईकोर्ट को बताया कि वकालत की शुरुआत करने वाले युवाओं को पहले कुछ साल में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में वकालत की शुरुआत करने वालों को प्रथम तीन वर्ष में वित्तीय सहायता का प्रावधान करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया व बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा को आदेश दिया जाए।
विधि सेंटर ऑफ लीगल पॉलिसी की 2020 की इलाहाबाद, मुंबई, केरल, मद्रास और पटना हाईकोर्ट के सर्वे के बाद तैयार की गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि इनमें दो साल से कम प्रैक्टिस वाले 46 प्रतिशत वकीलों की मासिक कमाई पांच हजार रुपये से कम थी। इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी कोर्स पास करने वालों को शुरुआती दौर में पांच हजार रुपये, इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट 8 से 15 हजार रुपये सहायता राशि के तौर पर देते हैं।
हाल ही में केरल में वकालत की शुरुआत करने वालों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। ऐसे में इसी के आधार पर हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के वकीलों के लिए भी प्रावधान किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने अब याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही याची को केरल में वित्तीय सहायता से जुड़ी नोटिफिकेशन सौंपने का आदेश दिया है।