हरियाणा में डीएपी खाद की किल्लत बनी हुई है, जिससे आपूर्ति पर मांग भारी पड़ रही है। खाद किल्लत की आशंकाओं के बीच किसान हाथों-हाथ सेंटरों से खाद खरीद स्टॉक कर रहे हैं। अक्तूबर माह में प्रदेश की अनुमानित मांग 58 हजार मीट्रिक टन थी, इसके मुकाबले 20 दिन में ही 51 हजार मीट्रिक टन डीएपी आ चुका है।
पहले से मौजूद 53 हजार एमटी खाद को मिलाकर कुल एक लाख एमटी से अधिक स्टॉक में से 71 हजार मीट्रिक टन की बिक्री हो चुकी है। अब डीएपी का स्टॉक 32 हजार मीट्रिक टन रह गया है। बढ़ती मांग को देखते हुए हरियाणा सरकार ने केंद्र को 31 अक्तूबर तक 16 और रैक (41 हजार एमटी) खाद की मांग भेजी है। आगामी 3 दिन में डीएपी की तीन स्पेशल ट्रेनें आने का भी दावा किया है।
इस समय प्रदेश में धान कटाई का सीजन चल रहा है। प्रदेश में 12 लाख हेक्टेयर में धान की बिजाई की गई थी। इसमें से आधे के अधिक रकबे में धान की कटाई चुकी है, जबकि शेष में बासमती किस्म की धान खड़ी है।
दक्षिण हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखीदादरी, हिसार समेत अन्य जिलों में जरूर सरसों बिजाई चल रही है। अब हर जिले में डीएपी की मांग बढ़ गई है। रबी के सीजन में डीएपी की कुल लागत 3 लाख एमटी के करीब होती है, लेकिन इस बार समय से पहले डीएपी अधिक मांग आपूर्ति पर भारी पड़ रही है। सरकार को आशंका है कि किसान बिना बिजाई ही डीएपी का स्टॉक कर रहे हैं।
रॉ मेटिरियल हुआ महंगा, उत्पादन घटा
खाद बनाने के लिए रॉ मेटिरियल ज्यादातर विदेशों से आता है। कोरोना की बंदिशों के चलते इस बार कच्चा माल कम आया। दूसरा चीन से सप्लाई नहीं आ रही है। इसलिए खाद कंपनियों के पास पहले के मुकाबले इस बार कम कच्चा माल पहुंचा तो उत्पादन भी कम है। कच्चे माल की कीमतें भी काफी बढ़ गईं हैं। इफको के प्रदेश विपणन अधिकारी डा. पुष्पेंद्र वर्मा का कहना है कि रोजाना एक रैक डीएपी आने की औसत है। किसान खाद का घरों में स्टॉक करें, जब बिजाई करनी हो, तभी ही खाद खरीदें।
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प्रदेश में ये है खाद उपलब्धता की स्थिति
श्रेणी लागत पहले से स्टॉक आया कुल बेचा शेष स्टॉक
डीएपी 3 लाख 53063 51500 104563 71779 32784
यूरिया 11 लाख 136683 93691 230374 53065 177309
एसएसपी 1 लाख 62864 8649 71513 23251 48262
एनपीकेएस 0.50 लाख 11046 4962 16008 8157 7851
(नोट : ब्यौरा मीट्रिक टन में है।)