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सुखना लेक पर उमड़ी भीड़...संक्रमण फैला तो जिम्मेदार कौन

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चंडीगढ़। सुखना लेक पर रविवार शाम को सैलानियों की होश उड़ा देने वाली भीड़ जमा हो गई। यह सब हुआ अफसरों की लापरवाही और कुप्रबंधन के कारण। अचानक सुखना लेक पर घूमने का समय बदल दिया गया। पहले से इसकी कोई सूचना भी नहीं दी गई थी। इसी का नतीजा रहा कि शाम तक सैकड़ों की संख्या में सैलानी जमा हो गए। शाम छह बजे जब सुखना पर जाने की इजाजत मिली तो लोग एक दूसरे पर गिरते पड़ते अंदर पहुंचे। गर्मी में महिलाएं और मासूम बच्चे बेहाल हो उठे।
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असल में प्रशासन ने रविवार को सुखना लेक चार घंटे सुबह और दो घंटे शाम को सैलानियों के लिए खोली। इस बदले हुए समय की जानकारी सैलानियों को नहीं थी। ऐसे में दिन में घूमने पहुंचे सैलानियों को शाम तक रुकने के लिए कह दिया गया। दूर दराज से आए सैलानी सुखना लेक के आसपास बैठकर शाम के छह बजने का इंतजार करने लगे। उनमें इसे लेकर रोष था कि यदि समय में बदलाव किया जाना था तो इसकी जानकारी पहले से देनी चाहिए थी। आखिर इतनी भीड़ जुटने के लिए जिम्मेदार कौन है।
एसडीएम सेंट्रल हरजीत सिंह संधू ने बताया कि महामारी में एहतियात बरतते हुए प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल सिंह के आदेश पर सुखना को रविवार को सुबह 5 बजे से 9 बजे तक और शाम 6 से 8 बजे तक खोला गया था। दोपहर में सुखना को बंद रखा था। समय सीमा की जानकारी लोगों को पहले दी नहीं गई थी, इस कारण भीड़ उमड़ी।
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दूसरी लहर के दौरान प्रशासन ने सुखना लेक जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। कुछ केस कम हुए तो सुबह दो घंटे के लिए लोगों को सैर करने की अनुमति दी गई। इसके बाद वार रूम की बैठक में सुखना को पूरी तरह सैलानियों के लिए खोल दिया गया। यहां बोटिंग भी शुरू कर दी गई।
आसपास के राज्यों से भी पहुंच रहे सैलानी
गर्मी के मौसम में शहरवासियों के अलावा आसपास के राज्यों के सैलानी भी चंडीगढ़ घूमने पहुंच रहे हैं। सुखना लेक मुख्य आकर्षण होने के कारण सैलानी यहां जरूर आते हैं। इनमें ज्यादा संख्या बच्चों और युवाओं की होती है।
रविवार को अक्सर उमड़ती है भीड़
सुखना लेक पर हर शनिवार और रविवार को काफी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। इस दौरान मास्क और सामाजिक दूरी की धज्जियां भी वे उड़ाते नजर आते हैं। पुलिस की टीम लगातार मास्क न पहनने वालों के चालान करती है लेकिन लोग लापरवाही से बाज नहीं आ रहे हैं।
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