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जालंधर में तीन तस्कर गिरफ्तार: 78.70 लाख रुपये की ड्रग मनी बरामद, पुलिस को मास्टरमाइंड की तलाश

Mon, 22 Aug 2022 02:03 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

आरोपी शिंदा ने पूछताछ में माना कि वह स्कूल और कॉलेज के छात्रों को नशे की तस्करी करता था लेकिन डील सुखदेव ही करवाता था, उसका काम सिर्फ माल देकर पैसे लेना था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जालंधर देहात की करतारपुर पुलिस ने ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया और कपूरथला निवासी तीन तस्करों को 78.70 लाख रुपये की ड्रग मनी, 150 ग्राम हेरोइन और मोटरसाइकिल समेत काबू किया है। एसपी (जांच) सर्बजीत सिंह बाहिया ने बताया कि करतारपुर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कश्मीर सिंह, शिंदा और सुखपाल हेरोइन की तस्करी करते हैं और भुलत्थ से मोटरसाइकिल पर नशे की खेप देने जा रहे हैं। इनके पास ड्रग मनी भी है।

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इसके बाद करतारपुर थाने के प्रभारी रमनदीप सिंह ने टी-प्वाइंट भुलत्थ मोड़ करतारपुर में नाका बंदी कर जांच शुरू की। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार तीन व्यक्ति आते दिखाई पड़े। डीएसपी बलकार सिंह की मौजूदगी में रोककर तीनों की जांच की गई तो कश्मीर सिंह उर्फ बिल्ला निवासी गांव डोगरा वाल कपूरथला के पास से 125 ग्राम हेरोइन और पांच लाख रुपये मिले। 

शिंदा निवासी गांव लक्खन खुर्द कपूरथला के पास से 10 ग्राम हेरोइन और सुखपाल निवासी मददोवाल कपूरथला के पास से पांच ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पता चला कि कश्मीर सिंह उर्फ बिल्ला के बेटा सुखदेव पूरे तस्करी रैकेट का प्रमुख है और हेरोइन लाना और कहां भेजना है, यह वही तय करता है। फिरहाल वह फरार चल रहा है।
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पूछताछ में कश्मीर सिंह उर्फ बिल्ला ने बताया कि 73 लाख 70 हजार रुपये की ड्रग मनी घर में गाड़ रखी है। पुलिस ने जेसीबी की मदद से खुदवाकर बाहर निकलवाया। एसपी (जांच) सर्बजीत बाहिया ने बताया कि फरार सुखदेव पर एनडीपीएस के छह मामले कपूरथला में दर्ज हैं और पिछले साल से ही वह जमानत पर चल रहा था। 

वहीं कश्मीर सिंह पर दो और शिंदा पर एक एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज है। पुलिस सुखदेव की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड लेंगे। शिंदा ने पूछताछ में माना कि वह स्कूल और कॉलेज के छात्रों को नशे की तस्करी करता था लेकिन डील सुखदेव ही करवाता था, उसका काम सिर्फ माल देकर पैसे लेना था।

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