मेयर रिंटू के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के 52 पार्षद सोमवार निगम हाउस में जुटे। निगम के सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षद परेड करते हुए निगम कमिश्नर के दफ्तर पहुंचे और निगम हाउस की बैठक बुलाने को कहा लेकिन कमिश्नर संदीप रिशी ने इसमें अपनी असमर्थता जताई और कहा कि यह अधिकार मेयर के पास हैं। इसके बाद कांग्रेस पार्षदों ने शाम तीन बजे से लेकर सायं पांच बजे तक चले हाई प्रोफाइल ड्रामे के बीच खुद ही बैठक करने के बाद निगम के सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी को निगम का मेयर घोषित कर दिया।
इस संबंध में जब निगम कमिश्नर संदीप रिशी से बात की गई तो उन्होंने कांग्रेसियों की इस बैठक को असांविधानिक और अवैध करार दिया और कहा कि निगम हाउस की बैठक बुलाने का अधिकार मेयर के पास ही है। संदीप रिशी ने कांग्रेस पार्षदों से कहा कि अगर वे बैठक बुलाना चाहते हैं तो लिखित में उन्हें दें ताकि उसकी जानकारी मेयर को दी सके। वहीं दूसरी तरफ सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी ने कहा कि वे पार्टी के पार्षदों का सम्मान करते हैं। पार्षदों ने उन्हें मेयर बनाया है। अगर उन्हें मेयर वाला दफ्तर नहीं मिला तो वे अपने दफ्तर से ही मेयर का काम देखेंगे। अगर उनके काम में रुकावट डालने की कोशिश की जाती है तो हाईकोर्ट जाएंगे।
महिला पार्षदों की जगह पति या बेटे का पहुंचना महिला अधिकारों का मजाक
आम आदमी पार्टी के यूथ ज्वाइंट डायरेक्टर वरुण राणा ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान निगम चुनाव में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थीं लेकिन यह देखा गया कि महिलाओं के पार्षद बनने के बाद उनके पति या बेटे हाउस की बैठक में कार्रवाई करते हैं, जो महिला अधिकारों के साथ घटिया मजाक है। उन्होंने कहा कि वे बहुत जल्द ही इसे लेकर निगम कमिश्नर संदीप रिशी को एक मांग पत्र देंगे, ताकि निगम हाउस की बैठक में महिलाओं के सम्मान और अधिकार की रक्षा की जा सके।