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CM विंडो पर आने वाली शिकायतों की अनदेखी, दो अफसरों पर गिरी गाज

Fri, 21 Oct 2016 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
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सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों की अनदेखी करना और उनका समाधान करने में लापरवाही बरतना दो अधिकारियों पर भारी पड़ गया। सरकार ने दोनों अफसरों को निलंबित कर दिया। शहरी स्थानीय निकाय विभाग तथा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के प्रति कड़ी नाराजगी जताते हुए इन विभागों के नोडल अधिकारियों को फटकार लगाई गई है।
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वीरवार को मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता और ओएसडी भूपेश्वर दयाल ने समीक्षा बैठक में दो अधिकारियों को निलंबित करने, 2 डॉक्टरों को बर्खास्त करने, पांच को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

समीक्षा बैठक में हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हिसार व बहादुरगढ़ क्षेत्र के रीजनल ऑफिसर डॉ. पीकेएमके दास द्वारा सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों के निपटान में रुचि न लेने के कारण उनको निलंबित करने के निर्देश दिए गए।
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इसके अलावा पानीपत के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतबीर सरोहा को एक प्राइवेट स्कूल के खिलाफ सही ढंग से जांच न करने के कारण निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनके अलावा डॉ. दारा सिंह और डॉ. आर.पी शर्मा को बर्खास्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सरकार ने जारी किया कारण बताओ नो​टिस

हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : अमर उजाला
वहीं मेवात की जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी सीमा शर्मा, एईटीसी विजय कुमार व घरौंडा के इंस्पेक्टर राजबीर सिंह के अलावा तावडू के एसएचओ तथा खान एवं भू-विज्ञान विभाग के नोडल अधिकारी को शिकायतों का समय पर निपटान न करने के बाबत उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

भूपेश्वर दयाल ने नोडल अधिकारियों को सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता के आधार निपटाने के निर्देश देते हुए कहा कि सीएम के आदेश हैं कि इस मामले में ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई शिकायत है तो उसके खिलाफ जांच का जिम्मा उसके समकक्ष अधिकारी के बजाए किसी सीनियर अधिकारी को दी जाए।

उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में शिकायत का निवारण हुए बिना शिकायतकर्ता अपनी शिकायत वापस लेता है तो उसमें भी यह देखा जाएगा कि मामला कितना गंभीर था और कथित आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच कोई ‘सांठगांठ’ तो नहीं है।
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