चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर के बाद अस्पतालों में गैर-कोविड मरीजों की अचानक से बढ़ी भीड़ ने व्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि महीनों तक सर्जरी का इंतजार करने वाले मरीजों से पीजीआई की इमरजेंसी भर गई है। डॉक्टर चाहकर भी इतनी ज्यादा संख्या में आ रहे मरीजों का ऑपरेशन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में वार्ड की भीड़ व डॉक्टरों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए इमरजेंसी ओटी को दो दिन के लिए बंद करने का अनुरोध किया गया है। इमरजेंसी स्टाफ की ओर से इस संबंध में लिखित पत्र भी निदेशक को दिया गया है।
पीजीआई के 39 ऑपरेशन थिएटरों में सामान्य तौर पर प्रतिदिन 100 से 150 सर्जरी की जाती है। मौजूदा समय में इसी रफ्तार से सर्जरी की जा रही है, लेकिन गंभीर मरीजों की बीमारी और ज्यादा जटिल होने से सर्जरी का समय डेढ़ से दो गुना बढ़ गया है। डॉक्टर ड्यूटी ऑवर से दो से तीन घंटे ज्यादा काम कर रहे हैं। पैरामेडिकल स्टाफ भी उनके साथ जुटा हुआ है।
हजारों मरीजों को सर्जरी का इंतजार
गौरतलब है कि कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के कारण लगातार पीजीआई में गैर कोविड मरीजों की सर्जरी बंद रही है। ऐसे में हजारों केस पेंडिंग हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सर्जरी के लिए बुलाने के बावजूद ओटी खाली न होने से उन्हें वेटिंग में रखना पड़ रहा है। मरीजों की स्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी है कि एक घंटे की सर्जरी करने में डॉक्टरों को कई घंटे लग रहे हैं, जिससे ओटी के बाहर अपनी बारी का इंतजार करने वाले कई मरीजों को बिना सर्जरी के लौटना पड़ रहा है। हालांकि, पीजीआई प्रशासन इस स्थिति से बचाव के लिए लगातार व्यवस्था कर रहा है।
बेहद गंभीर मरीजों की सर्जरी पहले
इस स्थिति से निपटने के लिए पीजीआई प्रशासन इमरजेंसी में भर्ती मरीजों में से बेहद गंभीर स्थिति वालों को पहले सर्जरी का मौका दे रहा है, ताकि इलाज में देरी के कारण उन मरीजों की जान पर न बने। वहीं, इमरजेंसी के जनरल सर्जरी वार्ड एक में बेड फुल होने के बाद दर्जनभर मरीज स्ट्रेचर पर भर्ती किए गए हैं। उन मरीजों के परिजनों का कहना है कि सर्जरी के लिए डेट देने के बाद भी क्यों रोका गया है समझ नहीं आ रहा, क्योंकि सर्जरी के इंतजार में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।