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चंडीगढ़: महिलाओं को सम्मान के साथ जीना भी सिखा रहा नगर निगम, हुनर पहचान बना रहा आत्मनिर्भर

Sun, 05 Sep 2021 12:29 PM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नगर निगम वर्तमान में 298 स्वयं सहायता समूह बनाकर संचालित करवा रहा है। इसमें युवाओं से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक शामिल हैं। स्वयं सहायता समूह का उद्देश्य ही आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए नगर निगम विशेषज्ञों की कार्यशाला भी आयोजित करता है।
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महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ नगर निगम साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं के लिए जाना जाता है। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम का ही दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डे-एनयूएलएम) विभाग जरूरतमंद महिलाओं के हुनर को पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है। इस योजना में नगर निगम पहले स्वयं सहायता समूह का निर्माण करता है। फिर बैंक से कर्ज की व्यवस्था कर उनका व्यवसाय स्थापित करवाता है और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के लिए खड़े रहने का हौसला भी देता है।

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नगर निगम वर्तमान में 298 स्वयं सहायता समूह बनाकर संचालित करवा रहा है। इसमें युवाओं से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक शामिल हैं। स्वयं सहायता समूह का उद्देश्य ही आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए नगर निगम विशेषज्ञों की कार्यशाला भी आयोजित करता है। समूह की महिलाओं का बैंक खाता खोला जाता है। इसमें हर महिला अपनी बचत का कुछ हिस्सा जमा करती है। समूह की किसी महिला को जरूरत पड़ते पर समूह के बैंक खाते से कम ब्याज पर कर्ज दिया जाता है। इस तरह समूह अपने आप में आत्मनिर्भर बन जाता है।


कोरोना महामारी में निभाया साथ
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कोरोना काल में काफी सहयोग किया। लोगों को मास्क बांटने के साथ जागरूक करने की जिम्मेदारी निभाई। मास्क बनाकर अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाया। इसके साथ निगम को भी मास्क उपलब्ध कराए। जब लोगों को खाने की जरूरत थी तो एकजुट होकर लोगों तक खाना भी पहुंचाया।
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परिवार ने नहीं दिया साथ, फिर भी आत्मनिर्भर
धनास के एरिया लेवल फेडरेशन की अध्यक्ष रूबी का जीवन किसी संघर्ष से कम नहीं है। रूबी को परिवार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली, लेकिन उन्होंने मंजिल तक का सफर तय किया। रूबी ने डे-एनयूएलएम के तहत सिलाई का कोर्स सीखा। रूबी का काम देखकर एक निजी कंपनी ने उन्हें सिलाई मशीन दी। अब रूबी अपना बुटीक चलाती हैं। वह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। वह जरूरतमंद महिलाओं को भी दक्ष बना रही हैं।

कमलेश के लिए उम्र तो एक नंबर है
सेक्टर-25 की एरिया लेवल फेडरेशन की अध्यक्ष कमलेश के लिए उम्र तो एक नंबर है। 65 साल की कमलेश ने स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़कर महिलाओं को प्रेरित करना शुरू किया। कोरोना काल में जहां बुजुर्गों को घरों में रहने के लिए कहा गया, वहीं उन्होंने फील्ड में उतरकर लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी उठाई। अपने स्तर पर भोजन से लेकर मास्क व सैनिटाइजर तक बांटे।

महिलाओं के लिए सरकार की दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन बेहतर है। इससे एक तरफ महिलाएं आत्मनिर्भर होती हैं, वहीं दूसरी ओर उनके हुनर को नई दिशा मिलती है। इसका उदाहरण कोरोना काल में देखने को मिला। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम      

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