लोगों का मानना है कि शिक्षक का काम सिर्फ स्कूल में बच्चों की पढ़ाई तक ही सीमित है, लेकिन चंडीगढ़ से सटे नयागांव के शिक्षकों ने कोरोनाकाल में केवल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया ही नहीं बल्कि लोगों के घर राशन भी पहुंचाया। यहां तक कि कई विद्यार्थी मोबाइल का रिचार्ज तक नहीं करवा पा रहे थे तो शिक्षकों ने अपनी जेब से उनके मोबाइल तक रिचार्ज करवाएं। ये शिक्षक पूरे इलाके के लिए एक मिसाल बने हुए हैं। इन्हें हर जगह प्रशंसा मिल रही है।
पहले डर लगा फिर पति से मिला हौसला
मेरे पति बैंक मे नौकरी करते हैं। वह पूरे लॉकडाउन के दौरान अपनी ड्यूटी पर जाते रहे। मुझे डर लगता था, लेकिन उन्हें देख कर मुझे हौसला मिलता रहा। नयागांव में जहां प्रवासी लोग ज्यादा रहते हैं तो उनके घर तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी बहुत ज्यादा थी। स्कूल के सभी अध्यापकों ने मिलकर एक क्लब बनाया था। अगर स्कूल के किसी बच्चे के परिवार को राशन की परेशानी होती थी तो हम खुद ही उसकी मदद करते थे। इलाके की किसी भी दुकान पर उसको भेज कर राशन दिलवा देते थे और उसका बिल हम खुद सभी अध्यापक मिलकर ऑनलाइन ही भुगतान करते थे।
-कमलजीत कौर, अध्यापिका, सेकेंडरी स्कूल नयागांव
हालात का किया डटकर मुकाबला
पति भी नौकरी करते थे, कोरोनाकाल में हमारे ऊपर भी जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं। बच्चों को मिड-डे मील का राशन भी घर-घर जाकर पहुंचाना था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि जब सभी लोग अपने घरों में हैं, तो एक महिला होकर मैं घर से बाहर कैसे निकल सकती हूं। बीमारी का डर भी था, लेकिन मेरी मां ने मुझे कहा कि जीवन में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। उनका हमें डटकर मुकाबला करना चाहिए। मां के समझाने के बाद मुझे कुछ हौसला आया उसके बाद हमने घर-घर जाकर बच्चों को मिड डे मील का राशन पहुंचाया।
-सुजाता, अध्यापिका, सेकेंडरी स्कूल नयागांव
मुश्किल समय में कुछ नया सीखने को मिला
ऑनलाइन कक्षाओं के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। ऑनलाइन एप पर कक्षा लगानी पड़ी। इसमें मेरे पति ने मेरा बहुत साथ दिया। उन्होंने मुझे ऑनलाइन एप पर कक्षा लगाने के लिए के बारे में बताया। इसके बाद डिपार्टमेंट की तरफ से भी ट्रेनिंग दी गई थी। कोरोना ने एक नई एजुकेशन प्रणाली को जन्म दिया है जो आज स्कूलों में भी लागू हो रही है हमें ऑनलाइन क्लास के जरिए सीखने को मिला था। आज हम उसका उपयोग ऑफलाइन क्लास में भी बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाने में उपयोग कर रहे हैं। यह बुरा दौर बहुत कुछ सिखाकर गया है।
-मीनू धवन, अध्यापिका, सीनियर सेकेंडरी स्कूल नाडा