वहीं, विक्रम पुंडीर ने चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जाने वाले कमर्शियल गाड़ियों पर होने वाले सैनिटाइजेशन पर भी सवाल उठाया है। उसका कहना है कि सैनिटाइजेशन के नाम पर एयरपोर्ट पर वाहन चालकों से 30 रुपये फीस लेकर उन्हें बेवकूफ बनाया गया। क्योंकि कोरोना काल में सिर्फ वाहनों के बाहरी हिस्से ही सैनिटाइज किए जा रहे थे, जबकि अंदर भी सैनिटाइजेशन होना चाहिए था। संक्रमण की संभावना वाहनों के सीटिंग एरिया में ज्यादा होती है। जिसका ध्यान एयरपोर्ट के पार्किंग एरिया के कारिंदों ने नहीं रखा। जो बेहद जरूरी था। क्योंकि सीटिंग एरिया से संक्रमण एयरपोर्ट परिसर से फ्लाइट तक पहुंच सकता है।
अगर एयरपोर्ट पर जाने के 10 मिनट फ्री, तो कैसे लिए 50 रुपये
विक्रम ने बताया कि एयरपोर्ट जब भी गया, महज चार से छह मिनट के बीच एयरपोर्ट के ड्रॉपिंग एरिया से बाहर आ गया है। ड्रॉपिंग एरिया में एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से सवारी छोड़ने के लिए दस मिनट फ्री हैं, लेकिन हर बार उससे 50 रुपये लिए गए हैं। बाकायदा उसके पास प्रवेश और निकासी की पर्ची भी है, जिसका जिक्र उसने आरटीआई में मांगे गए जवाब में किया है।
कुछ अनसुलझे सवाल
1. किस आधार पर एयरपोर्ट अथॉरिटी तय करता है कि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर प्रवेश शुल्क लिया जाए।
2. पार्किंग से मिलने वाली पर्ची में क्यों नहीं लिखा कि चालक यात्रियों को छोड़ने जा रहा है या लेने।
रिपोर्ट आएगी तो जांच करेंगे
चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर वाहन प्रवेश शुल्क को लेकर आरटीआई का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। इसकी रिपोर्ट मेरे पास आएगी तो उसकी जांच की जाएगी कि वाहन चालक से 10 मिनट के ड्रॉपिंग के लिए 50 रुपये चार्ज क्यों लिया गया है। रहा सवाल ड्रॉपिंग के चार्ज का तो 10 मिनट का कोई चार्ज नहीं है। इसके बाद वाहन अंदर रोके रखने पर फाइन लगाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कोई 11 और 12 मिनट बाद लौट रहा है, तो उससे पार्किंग वाले फाइन के रूप में 340 रुपये चार्ज कर देंगे। यह नियम इसलिए है कि कोई वाहन चालक ड्रॉपिंग एरिया में गाड़ी न पार्क कर दे। - अजय कुमार, सीईओ, चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट।