स्वास्थ्य विभाग की इमरजेंसी व्यवस्था जांचने के लिए स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने गुरुवार देर रात विभिन्न अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पतालों में मनमानेपन की पराकाष्ठा दिखी। कहीं नर्सिंग स्टाफ बातों में मशगूल नजर आया तो कहीं कर्मचारी वार्ड अंदर से बंद कर सोते मिले। इतना नहीं सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल की सुरक्षा को लेकर लापरवाह पाया गया। इस पर स्वास्थ्य सचिव ने कुछ की सेवा समाप्त करने और अवकाश रद्द करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए निदेशक स्वास्थ्य से अनुमोदन मांगा गया है। जबकि एक ही जगह पर 15 से 20 साल से तैनात कर्मचारियों पर स्थानांतरण नीति लागू करने की तैयारी है।
मनीमाजरा रात 11.55 से 12.30 तक पंजीकरण विंडो पर कोई मौजूद नहीं था। डीईओ व स्वीपर बातें करने में लगे हुए थे। इस दौरान इमरजेंसी में कई मरीज पंजीकरण विंडो पर आए और लौट गए। स्वास्थ्य सचिव ने ये देखकर तैनात कर्मचारियों को बाहर बुलाया और मरीजों की डिटेल मांगी। लेकिन ऑनलाइन सिस्टम पर मरीजों की डिटेल न होने की जानकारी दी गई। बताया गया कि सिर्फ मेडिको लीगल के मामलों में कंप्यूटर में एंट्री की जाती है। स्वास्थ्य सचिव ने मौके पर ही आउटसोर्स पर रखे गए स्वीपर की सेवा समाप्त करने व उसकी जगह पर कोविड के दौरान काम कर चुके पूर्व कर्मचारी को तैनात करने का निर्देश दिया।
पहली मंजिल पर स्थित जनरल वार्ड अंदर से बंद मिला। सीनियर नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी पर सोती मिली। पूछने पर बताया कि डॉक्टर के राउंड के बाद चोरी की आशंका पर वार्ड अंदर से बंद कर लिया था। इतना ही नहीं प्राइवेट वार्ड में स्वीपर सोते मिले।
स्वास्थ्य सचिव रात 12.50 पर सेक्टर 45 के सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां तैनात नर्सिंग स्टाफ का गैर जिम्मेदाराना रवैया देखकर वे चौंक गए। उनके वहां पहुंचने के बाद भी किसी नर्सिंग स्टाफ का ध्यान उनकी ओर नहीं गया। उनकी बातें रोकने के लिए स्वास्थ्य सचिव को उन्हें टोकना पड़ा। इसके बाद वे सेक्टर 22 के सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां ईसीजी रूम के बाहर एक कर्मचारी सोता हुआ मिला। पूछने पर उसने बताया कि वह ईसीजी टेक्नीशियन है जबकि वह स्वीपर था।
इसके बाद यशपाल गर्ग जीएमसीएच 32 पहुंचे। वहां 1.55 से 2.15 बजे तक रहे। एंट्री गेट पर 6 सुरक्षाकर्मी गप्पे मारते नजर आए। उन्हें अंदर आने जाने वालों से कोई मतलब नहीं था। गौरतलब है कि स्वास्थ्य सचिव ने इससे पूर्व 13 दिसंबर 2021 की रात भी जीएमसीएच 32 का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान दी गई चेतावनी का उनपर कोई असर नहीं था।