डॉक्टरों और पुलिस के बयान के मुताबिक, 44 घंटे तक नीचे मिट्टी में दबे रहने के कारण शव सड़ने लगा था। सुरेश का शव शाम साढ़े 4 बजे सिविल अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा दिया गया था। लेकिन पुलिस रिपोर्ट में देरी के कारण रात को पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। थाना करतारपुर के एसएचओ रमनदीप सिंह ने एफआईआर की पुष्टि करते हुए बताया कि धारा 304 के तहत एफआईआर नंबर 102 दर्ज की है और सुबह ही पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया।
मामले में कंपनी के डायरेक्टर और साइट इंजीनियर को नामजद किया गया है। सुरेश की मौत के बाद कंपनी ने काम को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। जिस बोरवेल में सुरेश गिरा था प्रशासन ने उसके आसपास के एरिया को कवर कर दिया गया और जिस जगह से मिट्टी की खुदाई की गई थी। उसमें दोबारा से मिट्टी को डाल दिया गया है। साथियों ने बताया की सुरेश लंबे समय से काम करता था। उस दिन हादसा कैसे हो गया पता ही नहीं चला।