कोर्ट के आदेश के बाद 13 सितंबर, 2018 को जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस से जारी पत्र में इस बात का साफ उल्लेख है कि स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाना अनिवार्य है। इनमें वे स्कूल शामिल थे जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं।
तीन फरवरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी दिया आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी किए गए पत्र को वर्ष 2018 में एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल द्वारा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसे उच्च न्यायालय ने 3 फरवरी 2020 में खारिज कर दिया था और डीईओ के आदेश को बरकरार रखा था।
जांच कर जारी करेंगे निर्देश
पहले भी विभाग की तरफ से गैर एनसीईआरटी किताबों से बच्चों को पढ़ाने पर मनाही के निर्देश दिए गए हैं। अगर स्कूलों में अभी भी निर्देश की अवहेलना की जा रही है तो जांच कर दोबारा निर्देश जारी करेंगे। - रुबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़।
पुरानी किताबें नहीं कर सकते इस्तेमाल
निजी स्कूल हर वर्ष किताबों में छोटे मोटे बदलाव कर देते हैं। हम किसी बच्चे से पुरानी किताबें लेकर उन्हें इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। हर वर्ष हमें नई किताबें ही खरीदनी पड़ती है।
- चंद्रप्रकाश।
एक कक्षा की किताब और स्टेशनरी पांच हजार रुपये की
निजी स्कूल किताबों के साथ नोटबुक भी अपने ही प्रकाशकों की मंगवाते हैं। इसमें नोटबुक पर उनके स्कूल का नाम लिखा होता है। हर स्कूल की अपनी दुकानें हैं, जहां से हम किताब खरीदते हैं। किसी अन्य दुकान पर हमें किताब नहीं मिलती है। इस बार किताब और स्टेशनरी का पूरा बंडल पांच हजार रुपये से अधिक का पड़ा था।
- वीरेंद्र, अभिभावक।
किताब खरीदने के लिए लगना पड़ता है लंबी कतारों में
किताबें खरीदने के लिए सुबह ही लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है। निजी स्कूल गैर एनसीईआरटी की किताब मंगवाते हैं, इसलिए इसे हम ऑनलाइन या किसी अन्य किताब की दुकान से भी नहीं खरीद सकते। स्कूल की अपनी दुकान तय होती है वहीं से हमें किताब खरीदनी पड़ती है।
- रुपिंदर कौर, अभिभावक।
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