सातवां वेतनमान पूरे देश में लागू हो गया, लेकिन पंजाब विश्वविद्यालय के एक हजार शिक्षकों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाया है। मामला सरकारों के बीच उलझा हुआ है। केंद्र सरकार ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं जबकि पंजाब सरकार पैसे नहीं होने की बात कह रही है। इससे शिक्षकों में आक्रोश है। वह सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी या फिर मंत्रियों से मिलने की योजना बना रहे हैं। पीयू में शिक्षकों की संख्या लगभग 1500 है। इसमें मानदेय पर भी शिक्षक रखे गए हैं, जिनका हर साल रिनुअल होता है। स्थायी शिक्षकों की संख्या एक हजार है। इन सभी को सातवां वेतनमान का लाभ दिया जाना है।
पहले मामला केंद्र सरकार के पास पहुंचा। केंद्र सरकार ने कह दिया कि पहले ही वह वेतन शिक्षकों का दे रही है। अन्य रकम देने में असमर्थ है। उन्होंने पंजाब सरकार की ओर रास्ता दिखा दिया। पंजाब सरकार के पास पीयू का प्रस्ताव पहुंचा तो पहले तो आनाकानी की गई लेकिन बाद में दबाव पड़ा तो एक कमेटी बना दी गई, जो इस वेतनमान पर निर्णय लेगी। सूत्रों का कहना है कि पंजाब सरकार के खजाने में हर साल सौ करोड़ रुपये देने को नहीं हैं। यह रकम भारी-भरकम है। इसके कारण फिलहाल शिक्षकों को लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है।
इंक्रीमेंट भी नहीं लगा
रिसर्च में जुटे 2008 के शिक्षकों को इंक्रीमेंट का लाभ भी नहीं मिला। कारण बताया कि कई शिक्षकों के पास दो रिसर्च पेपर नहीं हैं तो कुछ के पास अन्य मानक पूरे नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि यूजीसी ने 2008 में नियमावली बदल दी लेकिन इससे पूर्व में तैनात शिक्षकों को इसका लाभ दिया जाना चाहिए।
क्या कहते हैं शिक्षक नेता
केंद्र सरकार ने सातवां वेतनमान का लाभ देने से मना कर दिया है। पंजाब सरकार ने वेतन निर्धारण को काफी पहले कमेटी बनाई थी लेकिन अब तक निर्णय नहीं आया। कहा जा रहा है कि सरकार के पास रकम नहीं है। अब फिर से प्रस्ताव रखा जाएगा।
- प्रो. राजेश गिल, प्रेसीडेंट, पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन
सभी जगह सातवां वेतनमान लागू हो गया। पीयू के शिक्षकों को भी यह लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए पुटा की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही पीयू प्रशासन भी इस कार्य के लिए लगा हुआ है।
- प्रो. प्रोमिला पाठक, पूर्व अध्यक्ष, पुटा