शिक्षा विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बच्चों को स्पेशल ट्रेनिंग सेंटरों में लगभग दो साल की ट्रेनिंग दी जाती है। सत्र 2023-24 के बजट के अनुसार एक बच्चे की शिक्षा की ट्रेनिंग के लिए लगभग छह हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। बच्चे को ट्रेनिंग के बाद उसकी उम्र के अनुसार कक्षा में दाखिला दिया जाता है। सामान्य कक्षा में दाखिले के बाद भी स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर की ओर से बच्चे की शिक्षा में मदद की जाती है। स्कूल से बाहरी इन छात्रों को स्पेशल ट्रेनिंग सेंटरों पर ही स्टेशनरी, कौशल शिक्षा सामान, किताबें, स्वास्थ्य किट, टूथब्रश, शैम्पू, साबुन, टूथपेस्ट मुहैया करवाए जाते हैं।
स्पेशल सेंटरों में बच्चों को प्रशिक्षित करने के लिए छह माह का लक्ष्य दिया गया है जिससे उनको जल्दी सामान्य कक्षाओं के स्तर तक पहुंचाया जाए और उनके प्रदर्शन में ओवरऑल सुधार किया जाएगा। बच्चों की ट्रेनिंग को लेकर सख्त निगरानी रखी जाएगी और हर माह विभाग की ओर से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी। --हरसुहिंदरपाल सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक।