दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान फार्म पर लगे फोटो और हस्ताक्षर का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद तीनों फर्जी अभ्यर्थियों की निशानदेही पर दो असली अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए अमन, विक्रम सिंह और आनंद असली अभ्यर्थी थे जबकि इनकी जगह हिसार निवासी विकास, कैथल निवासी विजय कुमार और झज्जर निवासी विनीत शारीरिक परीक्षा देने आए थे। इनमें से अमन, विक्रम, विकास, विजय, विनीत को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है जबकि आनंद अभी तक फरार है।
उधर, सेक्टर-43 निवासी नवीन कुमार ने मुख्य विजिलेंस अधिकारी को पत्र लिखकर इस भर्ती की लिखित परीक्षा पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने पत्र में लिखा कि पेपर सीलबंद लिफाफे में नहीं थे। अभ्यर्थी मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर जा रहे थे। ओएमआर शीट भी तीन की जगह एक ही दी गई थी। लिखित भर्ती परीक्षा कराई पीयू ने थी।
लिखित परीक्षा में भी गोलमाल, फुटेज में दिखे फर्जी अभ्यर्थी
पुलिस ने लिखित परीक्षा के दौरान की गई अभ्यर्थियों की फोटोग्राफी को कब्जे में लिया है। तस्वीरों से पता चला है कि पकड़े गए अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा ही नहीं बल्कि लिखित परीक्षा भी किसी और ने दी थी। पुलिस उन आरोपियों की तलाश में जुट गई है। आनंद, विक्रम, अमन और सुमित की जगह किसी और ने लिखित परीक्षा दी थी, यह फुटेज में स्पष्ट हुआ है। वहीं आनंद, विक्रम और अमन की जगह शारीरिक परीक्षा भी दूसरे लोगों ने दी थी। अमन की जगह प्रतीक उर्फ ईलू नाम के युवक ने लिखित परीक्षा दी थी। वह बीएसएफ में एएसआई पद की परीक्षा के दौरान भी दूसरे की जगह परीक्षा में बैठा था। वर्ष 2021 में उसे गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
आनंद का जीजा भी शामिल, बैंक की नौकरी छोड़ शुरू किया खेल
पुलिस को आनंद के जीजा सोमवीर की भी तलाश है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सोमवीर और मामले में संदिग्ध सिपाही का जीरकपुर स्थित सिंहपुरा लाइट प्वाइंट के पास एक हॉस्टल है। आनंद की जगह परीक्षा देने आया विनीत उसी हॉस्टल में ही रुका था। सोमवीर गुरुग्राम में एक बैंक में मैनेजर था। फर्जी अभ्यर्थियों के माध्यम से भर्ती परीक्षा पास करवाने का धंधा अच्छा लगा तो उसने बैंक की नौकरी छोड़ दी।