पंजाब के होशियारपुर के स्वतंत्रता सेनानी चौधरी भोला राम गांधी ने आजादी की लड़ाई में अपनी और परिवार की जिंदगी दांव पर लगा दी थी। भोला राम गांधी के साथ उनकी पत्नी को कई बार जेल जाना पड़ा। जबकि घर में छोटे बच्चे बदहाली और डर के माहौल में जी रहे थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
भोला राम गांधी के पुत्र मदन लाल गांधी ने बताया कि 1932 में उन्होंने जान पर खेलकर होशियारपुर में अंग्रेजी हुकूमत के मुख्यालय कंपनी बाग में यूनियन जैक उतार फेंका और उसकी जगह भारतीय तिरंगा फहरा दिया। इस घटना के बाद उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और छह माह तक परिवार वालों को यह पता ही नहीं था कि आखिर वह हैं कहां। बाद में पता चला कि उन्हें कोटलखपत जेल में बंद रखा गया है।
वहां से वह साढ़े तीन वर्ष बाद लौटे। इसके बाद अलग-अलग समय पर उन्होंने बोरस्टल जेल बहावलपुर और अंडमान की सेलुलर जेल में भी करीब पांच साल तक कैद काटी। आजादी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह ने उन्हें ताम्र पत्र से नवाजा था।
वर्षों बाद राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी चौधरी भोला राम गांधी को सम्मानित किया। 2011 में चौधरी भोला राम गांधी ने 110 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उन्होंने करीब आठ साल तक विभिन्न जेलों में कैद काटी। चौधरी भोला राम महात्मा गांधी के भक्त थे और गांधी जी से प्रभावित होकर ही वह आजादी की लड़ाई में कूदे। आज भी उनके परिवार में महात्मा गांधी को भगवान का दर्जा दिया जाता है।
पिता के गांधी भक्त होने के कारण ही लगाया जाता है गांधी सरनेम
मदन लाल गांधी ने बताया कि उनके नाम के आगे गांधी सरनेम उनके पिता के गांधी भक्त होने के कारण ही लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि एक बार महात्मा गांधी होशियारपुर के बाजार वकीलां में किसी के घर आए तो पिता चौधरी भोला राम गांधी पहली बार उनसे वहीं मिले। वह गांधी जी से इतने प्रभावित हुए कि घर-बार की चिंता छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।