चंडीगढ़ के विभिन्न कॉलेजों और पंजाब यूनिवर्सिटी में आवेदन करने वाले उम्मीदवार भी नीट के परिणाम का इंतजार कर रहे थे। उन्हें अगर एमबीबीएस के लिए बेहतर कॉलेज मिलता है तो वह बीएससी के बजाय एमबीबीएस में दाखिला ले लेंगे। नीट के परिणाम के बाद अब पंजाब यूनिवर्सिटी में खाली होने वाली सीटों पर यूजी साइंसेज के कोर्स की अंतिम काउंसलिंग आयोजित करवाई जाएगी।
निरंतर प्रयास ही सफलता का मूल मंत्र: यज्ञम सेठी
मौलीजागरां निवासी 18 वर्षीय यज्ञम सेठी ने 720 में से 700 अंक हासिल किए हैं। जीएमएसएसएस-19 से बारहवीं (मेडिकल) करने वाले यज्ञम बोर्ड परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्होंने बताया कि किसी भी परीक्षा या कार्य में सफलता का एकमात्र मूल मंत्र निरंतर प्रयास है। कहा कि नीट एक प्रतियोगी परीक्षा है, इसलिए सोशल मीडिया से दूरी बनाई हुई थी, जिससे समय की बचत हो सके।
यज्ञम ने बताया कि उन्होंने बोर्ड परीक्षा के साथ ही नीट की तैयारी भी की थी। मेडिकल स्ट्रीम में आने की प्रेरणा बड़ी बहन हबीदी सेठी से मिली जो जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई के दौरान वह अपनी बहन के साथ अस्पताल गए। इस दौरान अहसास हुआ कि डॉक्टर कितना नोबल प्रोफेशन है। बताया कि पढ़ाई के साथ क्रिकेट और टेनिस भी खेलता था, जिससे एक्टिव रह सकूं। पिता जतिंदर सेठी चंडीगढ़ पुलिस में एएसआई और माता कोमल गृहिणी हैं।
सोशल मीडिया से बनाए रखी दूरी: देविका
फेज-5 मोहाली स्थित द मिलेनियम स्कूल से बारहवीं पास करने वाली 18 वर्षीय देविका लूंबा ने नीट में 720 में से 696 अंक हासिल किए हैं। देविका मूल रूप से लुधियाना की रहने वाली हैं। उन्होंने मोहाली से बारहवीं (मेडिकल) की पढ़ाई की है और बोर्ड परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
देविका ने बताया कि नीट की तैयारी के दौरान पूरे समय सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। पढ़ाई से ब्रेक के समय में संगीत सुनती थीं ताकि मूड फ्रेश हो जाए। कहा कि अभिभावकों की इच्छा थी कि मैं डॉक्टर बनूं, इसलिए ग्यारहवीं में मेडिकल स्ट्रीम का चुनाव किया और इसके लिए तभी से निरंतर मेहनत की। कोरोना महामारी के दौरान देखा कि देश में डॉक्टरों की कमी है इसलिए देश में ही रहकर लोगों की सेवा करना चाहूंगी। पिता गुरचरण लूंबा स्टॉक एक्सचेंज में बिजनेसमैन हैं जबकि माता किरण लूंबा शिक्षिका रह चुकी हैं।