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बढ़ रहे नशे को रोकने के लिए चंडीगढ़ में बनेगा एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स

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चंडीगढ़। शहर व आसपास के इलाकों में बढ़ रहे नशे के जाल को तोड़ने के लिए मंगलवार को नारको को-ऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) की राज्य स्तरीय बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया कि फैलते नशे को रोकने के लिए चंडीगढ़ में आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एक एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।
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यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनसीबी के डीडीजी (एनआर) ज्ञानेश्वर सिंह ने एनसीओआरडी के एजेंडे पर प्रेजेंटेशन दी। साथ ही चंडीगढ़ में नशे के जाल पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में गृह सचिव नितिन कुमार यादव के अलावा चंडीगढ़ पुलिस, प्रशासन, एनसीबी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इंटरनेट के माध्यम से चलाए जा रहे नशे के रैकेट को तोड़ने के तरीकों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
यह भी फैसला लिया गया कि चंडीगढ़ की साइबर सेल पुलिस की तरफ से एक समर्पित एंटी डार्क नेट सेल स्थापित किया जाएगा, जो डार्क वेब के माध्यम से नशीली दवाओं के व्यापार की जांच करेगा और चंडीगढ़ में इसके जाल को फैलने से रोकेगा। इस परियोजना में कॉलेज के छात्रों आदि को शामिल किया जाएगा।
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डाक-कूरियर से हो रही नशे की तस्करी, अब खोजी कुत्ते होंगे तैनात
बैठक में चर्चा की गई कि डाक-कूरियर के माध्यम से नशे की तस्करी हो रही है। इसे रोकने व जांच के लिए प्रमुख डाक केंद्रों पर खोजी कुत्तों को तैनात कर स्कैनर लगाए जाएंगे। चंडीगढ़ के सभी पब और रेस्तरां को अनिवार्य रूप से ड्रग-विरोधी साइन प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
एनसीबी बनाएगा कंट्रोल रूम
नशीली दवाओं की तस्करी की शिकायतों से निपटने के लिए एनसीबी एक समर्पित कंट्रोल रूम बनाएगा ताकि लोग सीधे शिकायत कर सकें। इसके लिए जल्द काम शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। फैसला हुआ है कि शहर के मादक पदार्थों की तस्करी के संभावित मार्गों व सीमाओं पर पुलिस की तरफ से नियमित रूप से गश्त की जाएगी। ड्रग्स कानून प्रवर्तन एजेंसियों को नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
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