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बादल के विरोध से नए एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्ति टली, कांग्रेस भी फैसले के खिलाफ

Thu, 18 Aug 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
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एलफोंस कन्नानथानम चंडीगढ़ के नए प्रशासक - फोटो : Amar ujala
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केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को पहली बार अपना अलग प्रशासक मिलने जा रहा है, मगर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पुरजोर विरोध के बाद नियुक्ति फिलहाल टल गई है। इस पद के लिए दिल्ली में ‘डेमोलिशन मैन’ के तौर पर मशहूर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी एवं बीजेपी नेता केजे अल्फोंस का नाम चंडीगढ़ प्रशासक पद के लिए तय किया गया।
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केंद्र की ओर से उन्हें जिम्मेवारी संभालने की सूचना भी दे दी गई। अलग प्रशासक की सूचना मिलते ही पंजाब के मुख्यमंत्री बादल और पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक सुर में इसका विरोध किया। बादल ने केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। 

फैसला पंजाब के हित में नहीं : बादल 

सीएम प्रकाश सिंह बादल - फोटो : फाइल फोटो
नए प्रशासक के मसले पर बादल ने कड़े शब्दों में कहा कि केंद्र का यह फैसला पंजाब के हित में नहीं है। चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है। इस मुद्दे पर पंजाब कोई समझौता नहीं करेगा। बादल ने इस मसले पर देर शाम गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की। उन्हें बताया कि चुनावी साल में इस तरह के फैसले से पंजाब के लोगों में गलत संदेश जाएगा।

कांग्रेस भी फैसले के खिलाफ

कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : file photo
वहीं कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि यह कदम अन्यायपूर्ण है और इसका उद्देश्य पंजाब से चंडीगढ़ छीनना है। उधर, विधानसभा चुनाव में जोर शोर से उतरी आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में अकाली दल और भाजपा को घेरे में लेते हुए चंडीगढ़ में राज्यपाल के स्थान पर किसी अन्य को प्रशासक तैनात करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
 

आतंकवाद और दंगों से निपटने के लिए बनाया था एडमिनिस्ट्रेटर

एलफोंस कन्नानथानम चंडीगढ़ के नए प्रशासक - फोटो : Amar ujala
1984 में पंजाब आतंकवाद और दंगों से जूझ रहा था। चंडीगढ़ में भी हालात बेहद खराब थे। पंजाब और चंडीगढ़ में तालमेल बनाने के लिए ही चंडीगढ़ की कमान पंजाब के राज्यपाल को एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर सौंपी गई थी। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए आईजी और एसएसपी के पदों पर भी पंजाब के अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। दंगों से निपटने के बाद आईजी का पद तो वापस लेकर यूटी कैडर से भरा जाने लगा। लेकिन एसएसपी आज भी पंजाब का ही बनता है।

कोट्टायम को बनाया था देश का पहला शिक्षित शहर

एलफोंस कन्नानथानम चंडीगढ़ के नए प्रशासक - फोटो : Amar ujala
एलफोंस उस समय लाइमलाइट में आए जब उन्होंने 1988 में करल के कोट्टायम जिले के कलेक्टर के रूप में साक्षरता अभियान छेड़ा। इसी अभियान की बदौलत 1989 में कोट्टायम देश का पहला 100 फीसदी साक्षर शहर बना था। आज पूरा केरल सबसे पढ़े लिखे राज्य के रूप में जाना जाता है।

इसके बाद उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी के कमिश्नर के तौर पर ज्वाइन किया। डीडीए में रहते उन्होंने कई अवैध बिल्डिंग को गिरवाकर जमीन खाली करवाई। उस समय इस जमीन की कीमत 10 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस डेमोलिशन ड्राइव के बाद एलफोंस को द डेमोलिशिन मैन कहा जाने लगा। इस कार्रवाई के बाद टाइम्स मैग्जीन में उन्हें 100 युवा ग्लोबल लीडर्स की सूची में शामिल किया गया था।
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लिखने के शौकिन है एलफोंस कन्नानथानम

एलफोंस कन्नानथानम चंडीगढ़ के नए प्रशासक - फोटो : Amar ujala
एलफोंस लिखने का भी शौक रखते हैं। वह मेकिंग अ डिफ्रेंस लिख चुके हैं। यह किताब सपनों को लेकर है। जिसमें साहस के साथ सपनों को जीतना बताया गया है। इसके अलावा एलफोंस विभिन्न समाचार पत्रों में लेख लिखते रहे हैं।
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