प्रशासन ने स्कूल पर डाली जिम्मेदारी
वहीं चंडीगढ़ प्रशासन ने घटना की जिम्मेदारी स्कूल पर डाल दी है। प्रशासन ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि स्कूल प्रबंधन की तरफ से कभी भी उन्हें ये आग्रह नहीं किया गया कि ये पेड़ जीवन और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। मुख्य वन संरक्षक देबेंद्र दलाई ने कहा कि स्कूल प्रबंधन की तरफ से इस पेड़ को लेकर कभी भी उन्हें ये जानकारी नहीं मिली कि ये पेड़ खतरनाक है और इससे किसी भी प्रकार का कोई हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि 2019 में स्कूल की तरफ से एक आम के पेड़ को लेकर उनके पास शिकायत आई थी, जिसे विभाग की तरफ से मंजूरी के बाद कटवा दिया गया था।
डीसी ने एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
कार्मल कान्वेंट स्कूल में पेड़ गिरने पर यूटी प्रशासन की खूब किरकिरी हो रही है, क्योंकि 250 साल पुराना पीपल का पेड़ हेरिटेज था और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी प्रशासन के वन विभाग के पास थी। प्रशासन अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। डीसी ने पूरे मामले की मजिस्टीरियल जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें एसडीएम सेंट्रल, हॉर्टिकल्चर विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और वन विभाग के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर को शामिल किया गया है। आदेश में कहा गया है कि यह कमेटी पेड़ गिरने के कारणों की जांच करेगी, जिसकी वजह से स्कूल के कई स्टूडेंट और स्टाफ सदस्य घायल हुए हैं। डीसी ने एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट जमा करने के आदेश दिए हैं।
सभी स्कूलों में जांच के लिए बनी कमेटी
स्कूल हादसे के बाद प्रशासन ने एक कमेटी का गठन किया है, जो स्कूल व अन्य शिक्षण संस्थानों का दौरा करेगी और देखेगी कि वहां लगे पेड़ों की क्या स्थिति है। भविष्य में किसी हादसे से बचने के लिए प्रशासन की तरफ से ये फैसला लिया गया है। पेड़ों का निरीक्षण करने के लिए नगर निगम, वन विभाग, बागवानी विंग के अधिकारियों को इसमें शामिल किया गया है।
ढाई साल पहले उठाया था स्कूलों में सूखे हेरिटेज पेड़ों का मुद्दा, नहीं हुई कार्रवाई
स्कूलों में सूखे हुए हेरीटेज पेड़ों का मुद्दा अमर उजाला ने लगभग ढाई साल पहले दिसंबर 2019 में उठाया था। इस दौरान सेक्टर-19 वाटिका स्कूल में हेरिटेज सूखे आम के पेड़ को कटवाने का मुद्दा उठाया गया था। इसको लेकर तत्कालीन प्रिसिंपल की ओर से सैकड़ों बार प्रशासन और बागवानी विभाग को पत्र लिखा गया था कि स्कूल में मूक बधिर बच्चे पढ़ते हैं। इस पेड़ के गिरने से कभी भी हादसा हो सकता है, इसे कटवाया जाए लेकिन प्रशासनिक अधिकारी कोई कार्रवाई करने के बजाय एक विभाग से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डालते रहे।
अमर उजाला की ओर से खबर लिखने के बाद बागवानी विभाग की ओर से सिर्फ सूखी टहनियों को कटवाया गया और जवाब दिया गया कि समय समय पर पेड़ की प्रूनिंग करेंगे और इस पर दवा लगाएंगे जिससे इस पेड़ को बचाया जा सके। वर्तमान समय में आम का हेरिटेज पेड़ पूरी तरह सूख चुका है लेकिन न तो बागवानी विभाग और न ही प्रशासन के अधिकारियों की ओर से इस पेड़ की कोई सुध ली गई है। वाटिका स्कूल के पीछे डीईओ दफ्तर होने के कारण सरकारी स्कूल के बच्चे और अभिभावक भी डीईओ दफ्तर इसी स्थान से होकर जाते हैं।