दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण में भी आम दिनों के मुकाबले बढ़ोतरी देखने को मिली। सेक्टर-17 में 58.4 डेसीबल था, जबकि सेक्टर-39 में ध्वनि प्रदूषण स्तर अधिकतम 78.2 डेसीबल दर्ज किया गया। अगर पिछले साल की बात की जाए तो ध्वनि प्रदूषण 66.6 डेसीबल दर्ज किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, रात के वक्त वातावरण में 35 डेसीबल और दिन में 45 डेसीबल से ज्यादा शोर नहीं होना चाहिए।
पीजीआई के एनवायरमेंट हेल्थ विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल ने कहा कि मोहाली और पंचकूला में चलाए गए पटाखों का असर चंडीगढ़ पर भी पड़ा है। चंडीगढ़ में भी कुछ जगह पटाखे चले हैं। गाड़ियों की संख्या भी सड़कों पर काफी रही, इसलिए प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) के सदस्य सचिव देबेंद्र दलाई ने कहा कि कोविड-19 के मरीजों को देखते हुए व सांस की बीमारी से परेशान लोगों के मद्देनजर यह प्रतिबंध लगाया था। लोगों को इसमें प्रशासन से तालमेल बनाना होगा।
पटाखे चलाने पर 28 केस दर्ज, 13 लोग मौके से गिरफ्तार
पटाखों पर प्रतिबंध के आदेश का पालन कराने के नाम पर पुलिस ने महज खानापूर्ति की। पुलिस को पटाखों की बिक्री और चलाने से संबंधित 90 सूचनाएं मिलीं। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आईपीसी-188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51बी के तहत 28 केस दर्ज किए। इनमें 24 पटाखे चला रहे थे, जबकि चार बेच रहे थे। पुलिस ने 13 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया। पुलिस के पास पूरे दिन में कुल 818 फोन आए। आग लगने की भी छोटी-छोटी 10 घटनाएं हुईं। 63 जगह एंबुलेंस गईं। दीपावली की रात लड़ाई झगड़े के 137 मामले सामने आए हैं।