चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने केंद्र सरकार की नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट-5 (एनएफएचएस) पर सवाल उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ में वर्ष 2020-21 में एक हजार बेटों पर बेटियों की संख्या महज 838 है लेकिन प्रशासन ने नए आंकड़े जारी किए हैं और दावा किया है कि शहर में साल-दर-साल बेटियों की संख्या बढ़ रही है। प्रशासन के अनुसार वर्ष 2020-21 में बेटियों की संख्या 838 नहीं, बल्कि 955 है। कहा है कि जो आंकड़े केंद्र ने जारी किए हैं, वो चंडीगढ़ ने दिए ही नहीं हैं।
एनएफएचएस में बताया गया कि चंडीगढ़ ने स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा के विभिन्न पहलुओं में सुधार हुआ है, लेकिन बेटियों को लेकर स्थिति और दयनीय हो गई है। इस पर शहर भर में प्रशासन की खूब किरकिरी हुई। प्रशासन ने बर्थ सर्टिफिकेट केआंकड़ों को जारी करते हुए पांच सालों केलिंगानुपात के आंकड़े दिए हैं। इसके अनुसार वर्ष 2017-18 में एक हजार बेटों पर बेटियों की संख्या 910 थी, जो लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2020-21 में ये आंकड़ा 955 पहुंच गया है। प्रशासन ने वर्ष 2021-22 में अप्रैल से लेकर सितंबर तक केआंकड़ों को भी सार्वजनिक कर दिया है। इस दौरान 3209 बेटे और 3000 बेटियां पैदा हुई हैं। इसके अनुसार लिंगानुपात 953 है। एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में चंडीगढ़ में लिंगानुपात में 14 प्रतिशत की गिरावट दिखाई गई, जो बहुत ज्यादा है। इससे हर कोई बेहद चिंतित था, क्योंकि देश में पहली बार एक हजार बेटों पर 1020 बेटियों की संख्या दर्ज की गई है लेकिन चंडीगढ़ को पिछड़ते हुए दिखाया गया।
आंकड़ों को ठीक कराने के लिए केंद्र से बात कर रहा है प्रशासन
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने कहा कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट-5 में चंडीगढ़ का जो लिंगानुपात बताया गया है, वो बेहद कम है। जबकि लिंगानुपात में शहर की स्थिति साल-दर-साल सुधरी है। केंद्र की तरफ से जारी किए गए आंकड़े कहां से लिए गए हैं, इसकी जानकारी नही है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के मिलान के लिए मामले को केंद्र सरकार में संबंधित अधिकारियों के साथ उठाया जा रहा है। गर्ग ने कहा कि प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में लिंगानुपात 955 है।
प्रशासन की तरफ से जारी किए गए आंकड़े
2017-18 2018-19 2019-20 2020-21 2021-22 (अप्रैल-सितंबर)
बेटे 7046 6935 6958 6351 3209
बेटियां 6412 6406 6608 6067 3000
लिंगानुपात 910 920 950 955 935