आचार्य के मुताबिक 2015 में उनके संबोधन के दौरान राष्ट्रपति भवन से लगातार फोन की घंटी बजती रही और आर्य कन्या कॉलेज रोहतक के कार्यक्रम के दौरान उनका संबोधन जारी रहा। हालांकि संबोधन पूरा होने के उपरांत जब उन्होंने काल रिसीव की तो उन्हें जो सूचना मिली, वह उनके जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इस कॉल के बाद वह एक शिक्षण संस्थान के प्रमुख आचार्य से एक प्रांत के राज्यपाल बनने का गौरव हासिल कर चुके थे।
आचार्य ने बताया कि जीरो बजट प्राकृतिक खेती और गो संवर्धन की दिशा में उनका जो अभियान है, उसे वह और बड़े स्तर पर गुजरात में भी चलाएंगे। इसके अलावा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और स्वच्छता अभियान की दिशा में मुहिम जारी रहेगी।
नौ में से दो नामों में पहला नाम आचार्य का
देश के नौ प्रदेशों में राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, मगर सोमवार को हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को गुजरात का राज्यपाल बनाने और उनकी जगह कलराज मिश्र को हिमाचल का राज्यपाल बनाने की दिशा में पहली सूचना है। शिक्षक से राज्यपाल और अब पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में राज्यपाल बनकर जाने से आचार्य का कद बढ़ा है। आचार्य के जीरो बजट प्राकृतिक खेती और गो संवर्धन अभियान को पीएम भी कई बार सराहना कर चुके हैं।
देश के दूसरी बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी दो दशक पहले हरियाणा में भाजपा के प्रभारी रहे हैं। गुजरात का बेटा तब हरियाणा में एक राजनीतिक दल का प्रभारी बनकर आया था अब दो दशक बाद हरियाणा का बेटा गुजरात में राज्यपाल बन कर जाएगा।
इस घोषणा के बाद आचार्य के साथ परिवार और उनके शुभचिंतकों को बधाइयां देने वालों का तांता लगा है। देर शाम कुरुक्षेत्र गुरुकुल पहुंचने पर ब्रह्मचारियों और स्टाफ ने उनका स्वागत किया।
कई आंदोलनों में सक्रिय रहे आचार्य
आचार्य देवव्रत का जन्म 18 जनवरी 1959 को पानीपत जिले के समालखा कसबे के पावटी गांव में हुआ। पिछले चार दशकों से उनका घर कुरुक्षेत्र में है और वे लंबे समय तक कुरुक्षेत्र गुरुकुल के प्राचार्य रहे हैं।
जीरो बजट खेती, गो संवर्धन और आर्य समाज की गतिविधियों के अलावा आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष रहते हुए कई आंदोलनों में सक्रिय रह चुके हैं। उनकी बड़ी भूमिका 13 अप्रैल 1913 को स्वामी श्रद्धानंदजी द्वारा स्थापित कुरुक्षेत्र गुरुकुल को बुलंदियों तक पहुंचाने में रही है।