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चंडीगढ़ पीजीआई का हाल: आठ बेड के न्यूरो सर्जरी वार्ड में 47 मरीज भर्ती, तनाव में काम कर रहे डॉक्टर

Sun, 21 Nov 2021 03:10 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई में महज 10 महीने में चार रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इसमें से तीन न्यूरो सर्जरी विभाग के हैं।
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चंडीगढ़ पीजीआई के न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ पीजीआई इमरजेंसी के प्रथम तल पर बने वार्ड 2 के न्यूरो सर्जरी वार्ड में शनिवार को हैरान करने वाली स्थिति थी। आठ बेड के वार्ड में न्यूरो सर्जरी के 47 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। इन 8 बेडों के बीच में 8 स्ट्रेचर भी लगाए गए हैं, जिन पर मरीज भर्ती हैं। इसके बाद यहां डॉक्टर और स्टाफ नर्स के आने-जाने तक की जगह नहीं बची है। ऐसी स्थिति में व्यवस्था में शीघ्र सुधार की बजाय पीजीआई प्रशासन फाइलों के अप्रूवल का इंतजार कर रहा है। 

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वार्ड से बाहर निकलते ही गैलरी में 31 स्ट्रेचर लगे हुए हैं। इन पर भी न्यूरो सर्जरी के मरीज भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। आलम ऐसा कि कोई मरीज करवट लेने में गिरते-गिरते बच रहा था तो किसी के परिजन उसके दौरा आने के डर से हाथ पकड़े सिरहाने खड़े थे। एक तरफ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी तो दूसरी ओर बेड का अभाव मरीजों की जान आफत में डालकर इलाज करने को मजबूर किए हुए हैं।

विभाग के एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने बताया कि 8 बेड के लिए 16 स्टाफ नर्स और एक डॉक्टर की तैनाती की गई है, जबकि 47 मरीजों के लिए कम से कम 25 नर्सिंग स्टाफ व 3 डॉक्टर चाहिएं। एक डॉक्टर मरीजों का एडमिशन, डिस्चार्ज और इलाज करने में तनाव का शिकार हो रहा है। उधर, यहां भर्ती मरीजों के परिजन दिन-रात बेड खाली होने का इंतजार करते रहते हैं। उन्हें अपने मरीज के स्ट्रेचर से गिरकर चोटिल होने की चिंता परेशान कर रही है। 
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तनाव ऐसा कि जान पर बन आ रही
स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का असर पीजीआई के हर विभाग में है, लेकिन न्यूरो सर्जरी विभाग में काम के तनाव के चलते रेजिडेंट डॉक्टर के आत्महत्या का प्रयास करना गंभीर है। पीजीआई में महज 10 महीने में चार रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इसमें से तीन न्यूरो सर्जरी विभाग के हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के बीच उनसे ट्रॉलियां हटवाई जाती हैं। मजबूरी में वे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का भी काम कर रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे तनाव का स्तर काफी बढ़ गया है।

नर्सिंग स्टाफ के 1500 पद सृजन की फाइल लंबित
पीजीआई में मरीजों का दबाव एम्स दिल्ली के समान है, लेकिन नर्सिंग स्टाफ की संख्या आधे से भी कम। एम्स में 6 हजार नर्सिंग स्टाफ तैनात हैं, जबकि पीजीआई में ढाई हजार। इसका असर भी चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ रहा है। वहीं, मानकों को पूरा करने के चक्कर में 170 पद खाली पड़े हैं, जबकि 1500 नर्सिंग स्टाफ के पद सृजन की फाइल मंत्रालय में तीन साल से लंबित है। काम के दबाव के कारण नर्सिंग स्टाफ भी बेहद तनाव में है।

खाली पदों को भरने के साथ नए पद सृजन की लंबित फाइलों पर निदेशक बेहद गंभीर हैं। निदेशक ने कुछ दिनों पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव से मुलाकात कर प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का अनुरोध किया है। जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। -कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई

 

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