पीजीआई का 8वां वार्षिक शोध दिवस शुक्रवार को आयोजित किया गया। इसमें दो वर्षों के दौरान हुए 576 में से बेहतरीन 36 शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसमें कोविड पर किए गए 58 शोध में से तीन सम्मानित हुए। पीजीआई के डीन रिसर्च प्रो. एके गुप्ता ने कहा कि शोध के क्षेत्र में पीजीआई अब एम्स को बराबर टक्कर दे रहा है। भार्गव सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पीजीआई के पूर्व निदेशक प्रो. वाईके चावला और पूर्व डीन रिसर्च प्रो. दिगंबर बेहरा ने किया। उन्होंने शोध के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं और उसके समाधान पर विस्तार से जानकारी दी। पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम, डीडीए कुमार गौरव, डीन एकेडमी प्रो. जीडी पुरी व अतिथियों ने डीन रिसर्च प्रो. एके गुप्ता को बधाई भी दी।
ये भी पढ़ें-
अलर्ट : हरियाणा के सीएम मनोहर लाल को राष्ट्र विरोधी ताकतों से खतरा, अफसरों की उड़ी नींद
इनको दिया गया सम्मान
मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. राकेश यादव, हिस्टोपैथोलॉजी के डॉ. दिव्य ज्योति चटर्जी, हिस्टोपैथालॉजी के डॉ. सुरवरदीप मित्रा, फार्माकोलॉजी के डॉ. आशीष कुमार कक्कर व डॉ. अमोल नारायण पाटिल, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. अर्चना, इंडोक्राइनोलॉजी के डॉ. आशु रस्तोगी, गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी के डॉ. विशाल शर्मा, पल्मोनरी मेडिसिन की डॉ. सहजल धुरिया, आप्थोमोलॉजी के डॉ. दीक्षा कटोच, न्येरोलॉजी के डॉ. सुशांत के साहो और सर्जिकल गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी के डॉ. हरजीत सिंह को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पल्मोनरी मेडिसिन के डॉ. इन्द्रपॉल सिंह सहगल, पीडियाट्रिक के डॉ. जोगिंदर कुमार, हेपेटोलॉजी की डॉ. निपुण वर्मा, ओरल हेल्थ साइंस की डॉ. शिप्रा गुप्ता, ऑथ्रोपेडिक के डॉ. संदीप पटेल, यूरोलॉजी के डॉ. आदित्य पी शर्मा, फार्माकोलॉजी के डॉ. विकास मेधी और डॉ. लेखा सेहा, बायोकेमिस्ट्री की डॉ. इंदू वर्मा, साइकेट्री के डॉ. संदीप ग्रोवर, पल्मोनरी मेडिसिन के डॉ. रितेश अग्रवाल, डर्मोटोलॉजी विभाग के डॉ. सुनील डोगरा को नवाजा गया।
ये भी पढ़ें-
चंडीगढ़: 20 माह में 19 पेशी, अवैध पीजी में अग्निकांड की भेंट चढ़ी हिसार की मुस्कान को आज भी इंसाफ का इंतजार
वहीं, आप्थोमोलॉजी की डॉ. वैशाली गुप्ता और डॉ. रमनदीप सिंह, एनेस्थिसिया की डॉ. जतिंदर कौर मक्कर, एनोटॉमी की डॉ. अंजलि अग्रवाल, बायोकेमिस्ट्री के डॉ. अर्नब पटेल, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. अनुप के घोष, कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. रविंद्र खैवाल व डॉ. शंकर प्रिंजा, इंटर्नल मेडिसिन की डॉ. शेफाली के शर्मा, न्यूरोलॉजी के डॉ. एसएस ढंढापानी, ईएनटी के डॉ. संदीप बंसल और न्यूरोलॉजी के डॉ. प्रवीण को भी सम्मान दिया गया।
कोविड और मधुमेह पर किए शोध ने दिलाया सम्मान
इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने कोविड के दौरान मधुमेह वाले मरीजों पर शोध किया। इसमें उन मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की उपयोगिता साबित की और बताया कि कौन सी दवा ऐसे मरीजों को दी जानी चाहिए और कौन सी नहीं। वहीं, एक अन्य शोध के जरिये बताया कि मधुमेह नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन सबसे सुरक्षित दवा है। इसे कोविड के दौरान या अन्य गंभीर बीमारियों में भी मधुमेह नियंत्रित करने के लिए लिया जा सकता है।
ये भी पढ़ें-
रिठाल हत्याकांड: रोहतक में हत्या की दोषी दो महिलाओं समेत चार लोगों को उम्रकैद, साढ़े 4 लाख रुपये जुर्माना भी देना होगा
स्लिप एप्निया के मरीजों की डाइग्नोसिस के लिए तय किया मानक
ईएनटी विभाग के प्रो. संदीप बंसल ने ऑब्सट्रेक्टिव स्लिप एप्निया के मरीजों की सर्जरी के लिए उचित मानक तय करने से संबंधी शोध किया है। इसमें एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. दिव्या जैन के साथ मिलकर किए गए शोध में उन दवाओं पर काम किया गया, जो ऐसे मरीजों को प्राकृतिक नींद दिलाने में सहायक हों, ताकि उस स्थिति में वास्तविक समस्या का पता लगाकर उसके अनुरूप सर्जरी प्लान की जा सके।
प्लेटलेट्स खून जमाने के साथ दे सकता है ब्रेन हैंब्रेजिंग भी
पीडियाट्रिक नियोनेटोलॉजी के डॉ. जोगिंदर कुमार ने समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में पाई जाने वाली बीमारी पीडीए पर प्लेटलेट्स के प्रभाव का शोध किया। इसमें यह बात सामने आई कि खून जमाने के लिए नवजात को दिया गया प्लेटलेट्स उसे ब्रेन हैंब्रेजिंग कर सकता है। विश्व में पहली बार शोध से पुष्ट किया गया कि प्लेटलेट्स देने से खून जमने के बजाय हैंब्रेजिंग का कारण बन सकता है।
ये भी पढ़ें-
महेंद्रगढ़: परिजन जिसे दो दिन से ढूंढ रहे थे, वह युवती अनाज मंडी के कुएं में गिरी मिली, बीएससी तक कर चुकी है पढ़ाई
त्वचा और फेफड़ा सुरक्षित करने वाली दवा का पता लगाया
इम्युनोलॉजी विभाग की डॉ. शेफाली ने सिस्टेमिक्स क्यूरोसिस नामक बीमारी पर दवाओं का शोध किया। इस बीमारी में त्वचा और फेफड़ा सिकुड़ जाता है। एंटी फाइब्रोटिक्स ड्रग देकर इस बीमारी पर उसके परिणाम की जांच की गई। इसका अच्छा परिणाम सामने आया। यह अपने तरह का विश्व का पहला शोध है, जिसमें ऐसे मरीजों को दी जाने वाली दवा के प्रभाव का आकलन कर उसे सही ठहराया गया।
कोविड पर इनके शोध हुए सम्मानित
- फार्माकोलॉजी विभाग के प्रो. विकास मेधी।
- इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो. रीमेश पॉल।
- इंडोक्राइलोलॉजी के ही प्रो. संजय कुमार भडाडा।
2019-20 में इतने शोध हुए प्रकाशित
- पीडियाट्रिक्स-221
- इंटर्नल मेडिसिन-121
- ऑप्थोमोलॉजी-93
- एनेस्थीसिया-91
- न्यूरोलॉजी-88
- डर्मोटोलॉजी-78
- साइकेट्री-67
ये भी पढ़ें-हरियाणा: सीएम मनोहर लाल ने होनहारों को किया सम्मानित, बोले-पीपीपी में सत्यापित गरीब बच्चों को मिलेगी मुफ्त शिक्षा
इन फैकेल्टी के शोध को 2018-21 में हुई सबसे ज्यादा बाहरी फंडिंग
- इंडोक्राइनोलॉजी के प्रो. एस भडाडा को उनके 7 अलग-अलग प्रोजेक्ट केलिए
- फार्मोकोलॉजी के डॉ. विकास मेधी को 6 प्रोजेक्ट केलिए
- मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. नीलम टनेजा को 5 प्रोजेक्ट के लिए
- पीडियाट्रिक्स के जोसेफ एल मैथ्यू के 5 प्रोजेक्ट के लिए
- कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. शंकर प्रिंजा के चार प्रोजेक्ट के लिए
- पीडियाट्रिक्स के डॉ. विजनेश के 4 प्रोजेक्ट के लिए
- मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. शिव प्रकाश के चार प्रोजेक्ट के लिए
- गायनकोलॉजी की डॉ. वनिता सूरी के चार प्रोजेक्ट के लिए
पीजीआई के शोध कार्य पर इतनी मिली फंडिंग (2018-21 के बीच)
- प्रोजेक्ट का प्रकार प्रोजेक्ट की संख्या फंडिंग
- आंतरिक प्रोजेक्ट-123 73480060
- बाह्य प्रोजेक्ट-182 900711038
ये भी पढ़ें-रोहतक: बाइक पर जा रही युवती पर कार सवार युवकों ने चलाई गोली, घर जाकर पता चला पैर में लगी है
पीजीआई में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में शोध की संख्या तेजी से बढ़ी है। मरीजों का दबाव बढ़ने के बावजूद हमारे विशेषज्ञ शोध पर पहले से ज्यादा फोकस कर रहे हैं। उसी का नतीजा है कि हम शोध कार्यों में भी देश के सर्वोच्च संस्थान के समकक्ष पहुंच गए हैं।
-प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई