मामला बेशक एमएसपी का हो या फिर किसानों की कर्जमाफी का, सरकार सभी वादों से मुकरती नजर आ रही है। किसानों पर दिल्ली और दिल्ली की सीमाओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस नहीं लिए जा रहे। खराब मौसम के चलते बर्बाद हुई नरमे की फसल का मुआवजा नहीं दिया जा रहा। गन्ने की फसल मे किये गए 35 रुपये प्रति क्विंटल के इजाफे की रकम किसानों को अब तक नहीं मिल सकी। इस मीटिंग में बीबीएमबी का मामला भी उठाया गया।
दिल्ली में 14 मार्च को होने जा रही एसकेएम की बैठक में यह तमाम मुद्दे एजेंडे पर रखे जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर के संघर्ष की नई रूप रेखा तय की जाएगी। बीकेयू राजेवाल के बलबीर सिंह राजेवाल, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब के कमलप्रीत सिंह पन्नू, बीकेयू पंजाब के फुरमान सिंह, जमहूरी किसान सभा के कुलवंत सिंह संधु, बीकेयू डकौदा के बूटा सिंह बुर्जगिल, केकेयू पंजाब के निर्भय सिंह ढुड़ीके, बीकेयू पंजाब के रुलदू सिंह मानसा, कुल हिंद किसान सभा के बलकरन सिंह, किसान बचाओ मोर्चा के लखविंदर सिंह, बीकेयू मानसा पंजाब के बोघ सिंह, एआईकेएफ सेखों के किरणजीत सिंह सेखों, बीकेयू कादीयां के हरमीत सिंह कादीयां, एआईकेएफ भंगू के प्रेम सिंह भंगू, दोआबा किसान यूनियन पंजाब के कुलदीप सिंह वजीदपुर, बीकेयू दोआबा के मंजीत सिंह राय, किसान संघर्ष कमेटी दोआबा के मुकेश चंदर, भारतीय किसान मंच के बूटा सिंह शादीपुर और दोआबा संघर्ष कमेटी के जंगवीर सिंह शामिल हुए। इसमें इंडियन फार्मर एसोसिएशन के सतनाम सिंह बहरु, आजाद किसान संघर्ष कमेटी के हरजिंदर सिंह टांडा और माझा किसान संघर्ष कमेटी के बलविंदर सिंह राजु औलख ने बैठक में लिए गए फैसलों पर अपनी सहमति मोबाइल फोन के जरिये प्रगट की।