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Bank Fraud: भाजपा नेता मोहित कंबोज को राहत, CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने वाली निचली अदालत के आदेश पर रोक

Wed, 28 Feb 2024 01:07 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bank Fraud: कंबोज और कई अन्य पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 103 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जयवंत यादव ने 23 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला पूरी तरह से स्थापित होता है। 
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सीबीआई (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुंबई की एक सत्र अदालत ने टेनेट एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) और भाजपा नेता मोहित कंबोज व अन्य को राहत दे दी है। अदालत ने उनके खिलाफ एक मामले में सीबीआई की ओर से दायर क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। सत्र अदालत ने निर्देश दिया है कि कार्यवाही को वापस मजिस्ट्रेट अदालत में भेजा जाए और सीबीआई को सुनवाई का अवसर देकर इस मुद्दे पर नए सिरे से फैसला करने का निर्देश दिया जाए।

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23 अक्टूबर, 2023 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, आदेश में केंद्रीय एजेंसी को आगे की जांच करने का निर्देश दिया गया था। मजिस्ट्रेट अदालत ने तब कहा था कि उसे प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मिली है। मामले में नामजद आरोपियों ने इस आदेश के खिलाफ अपील के साथ सत्र अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

यह मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, नरीमन प्वाइंट के अधिकारियों द्वारा टेनेट एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों/गारंटरों और अन्य के खिलाफ बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया था कि कंपनी के सीएमडी कंबोज, कंपनी के निदेशक जितेंद्र कपूर, नरेश एम कपूर, सिद्धांत आर बागला, हितेश मिश्रा, रुद्राक्ष मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (कॉरपोरेट गारंटर), मेसर्स ललित और सुरेंद्र (चार्टर्ड अकाउंटेंट) और एक अज्ञात लोक सेवक ने जालसाजी की और बैंक की क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करके बैंक के साथ धोखाधड़ी की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को आरोपियों के खातों में भेज दिया गया।
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कंबोज और कई अन्य पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 103 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जयवंत यादव ने 23 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला पूरी तरह से स्थापित होता है। 

अदालत ने कहा "मैं मानता हूं कि प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी), 417, 420, 467, 468 और 471 (साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी) के तहत दंडनीय अपराध किए गए प्रतीत होते हैं, लेकिन की गई जांच पर्याप्त नहीं है। यह अधूरा है।" 

अदालत ने कहा, 'आरोपी के आपराधिक कृत्य से निपटने की जरूरत है क्योंकि फर्जी दस्तावेज बनाकर और एक राष्ट्रीयकृत बैंक (सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया) को करोड़ों रुपये का चूना लगाकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया है।' अदालत ने कहा कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज किया जा सकता है और आगे की जांच करने और उचित रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जा सकता है।

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